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एशियाई खेल 2026: बेटियों के सोने से दमका हिमाचल, पुष्पा राणा की कप्तानी में फिर कबड्डी चैंपियन बना भारत

Sun, 27 Sep 2026 10:23 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला/संवाद/मंडी/सोलन

सार

Asian Games 2026: ऊंचे पहाड़ों की छाती चीरकर जब सपने उगते हैं, तो उनकी जड़ें संघर्ष से सींची जाती हैं। जापान में केवल पदकों की खनक ही नहीं बल्कि उन पगडंडियों और अभावों को पीछे छोड़ने की गूंज थी, जिन पर युवाओं ने मेहनत से संघर्ष किया। रितु नेगी, पुष्पा राणा, ज्योति ठाकुर और भावना की जांबाज रेड और टैकल ने कबड्डी में लगातार स्वर्ण दिलाया। सावन बरवाल ने मैराथन में रजत पदक की लकीर खींच दी। यह जीत हर उस युवा की है, जो अंधेरी घाटियों में भी सूरज देखने का हौसला रखता है।
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भारतीय टीम की जीत के बाद खुशी में झूमतीं खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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एशियन गेम्स के महिला कबड्डी फाइनल में ईरान को हराकर स्वर्ण पदक जीतने के बाद भारतीय महिला कबड्डी टीम की कप्तान पुष्पा राणा ने कहा कि देश के लिए स्वर्ण जीतने की खुशी को शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि टीम ने फिर स्वर्ण पदक जीतने के लिए लंबे समय तक कड़ी मेहनत और अभ्यास किया। अब मेहनत रंग लाई और लक्ष्य हासिल हुआ। अमर उजाला से फोन पर बातचीत में पुष्पा राणा ने कहा कि स्वर्ण जीतने के बाद पूरी टीम बेहद खुश है। उन्होंने कहा कि सरकारों को खिलाड़ियों की उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित सहयोग और नौकरी के अवसर देने चाहिए, ताकि उन्हें भविष्य के लिए बेहतर अवसर मिल सकें।

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पूजा ने खोली राह, पुष्पा ने स्वर्ण से संवारा कारवां
धर्मशाला। जिस कबड्डी मैट पर 12 साल पहले पूजा ठाकुर ने हिमाचल से कदम रखा था, उसी मैट पर अब पुष्पा राणा की कप्तानी में देश-प्रदेश की बेटियों ने फिर सबसे ऊपर तिरंगा लहरा दिया। एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम ने ईरान को 37-34 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया तो हिमाचल की बेटियों का सुनहरा सफर भी एक नए पड़ाव तक पहुंच गया। 2014 में पूजा ठाकुर से शुरू हुई कहानी अब 2026 में पुष्पा राणा, रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर तक पहुंच चुकी है। 12 साल के इस सफर में हिमाचल की नौ बेटियां एशियन गेम्स में भारतीय महिला कबड्डी टीम का हिस्सा बन चुकी हैं।

इंचियोन में पूजा ने खोली राह
2014 के इंचियोन एशियन गेम्स में पूजा ठाकुर भारतीय महिला कबड्डी टीम में शामिल हुईं। भारत ने स्वर्ण पदक जीता और पूजा ने हिमाचल की महिला कबड्डी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने की शुरुआत की।

जकार्ता में तीन खिलाड़ियों ने बढ़ाया कारवां
2018 के जकार्ता एशियन गेम्स में कविता ठाकुर, प्रियंका नेगी और रितु नेगी ने भारतीय टीम की जर्सी पहनी। भारत को इस बार रजत पदक मिला, लेकिन हिमाचल की बेटियों की राष्ट्रीय टीम में मौजूदगी और मजबूत होती गई।

हांगझोउ में पांच बेटियां बनीं स्वर्ण विजेता
2023 में हुए हांगझोउ एशियन गेम्स में रितु नेगी, पुष्पा राणा, सुषमा शर्मा, निधि शर्मा और ज्योति ठाकुर भारतीय टीम का हिस्सा बनीं। रितु नेगी की कप्तानी में भारत ने स्वर्ण पदक जीता। एक साथ हिमाचल की पांच खिलाड़ियों का स्वर्ण विजेता टीम में शामिल होना प्रदेश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि रहा।

अब पुष्पा की कप्तानी में फिर सोना
2026 के एशियन गेम्स में पुष्पा राणा ने भारतीय टीम की कप्तानी संभाली। उनके नेतृत्व में भारत ने ईरान को 37-34 से हराकर फिर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस टीम में हिमाचल की पुष्पा राणा, रितु नेगी, ज्योति ठाकुर और भावना ठाकुर शामिल रहीं।

पुष्पा, रितु और ज्योति पहले भी एशियन गेम्स में स्वर्ण जीत चुकी थीं, जबकि भावना ठाकुर ने पहली बार इस बड़े मंच पर उतरते ही स्वर्णिम शुरुआत की। 2014 में एक खिलाड़ी से शुरू हुई यह यात्रा अब चार खिलाड़ियों की मजबूत मौजूदगी तक पहुंच चुकी है और हर बार हिमाचल का नाम भारत की जीत के साथ जुड़ता गया है।

प्रदेश से तीन-चार बेटियां लगातार टीम में : पूजा
पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पूजा ठाकुर ने कहा कि उनके लिए यह गर्व की बात है कि जिस सफर की शुरुआत एक खिलाड़ी से हुई थी, आज हिमाचल की तीन-चार बेटियां लगातार भारतीय टीम का हिस्सा बन रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे भी प्रदेश की बेटियां भारत की जर्सी पहनकर देश के लिए पदक जीतती रहेंगी।

भारत की जीत पर एनसीओई में जश्न
एशियन गेम्स के महिला कबड्डी फाइनल में भारतीय टीम की जीत का रोमांच साई के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (एनसीओई) धर्मशाला में टीवी स्क्रीन के सामने बैठे खिलाड़ियों के चेहरों पर भी नजर आया। सेंटर की कबड्डी खिलाड़ियों ने पूरा मुकाबला टीवी पर देखा। भारतीय टीम के हर अंक पर तालियां बजती रहीं और खिलाड़ी उसकी जीत के लिए दुआ करती रहीं। हर अंक के साथ खिलाड़ियों की धड़कनें बढ़ती रहीं।

अंतिम सीटी बजते ही भारत ने जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। भारतीय जीत के साथ एनसीओई में खुशी की लहर दौड़ गई और खिलाड़ी झूमने लगे। खिलाड़ियों ने तालियां बजाकर जीत का जश्न मनाया। भारतीय टीम में हिमाचल की चार बेटियां रितु नेगी, कप्तान पुष्पा राणा, ज्योति ठाकुर और भावना शामिल हैं। इनमें पुष्पा राणा, ज्योति ठाकुर और भावना एनसीओई धर्मशाला से जुड़ी खिलाड़ी हैं। ऐसे में सेंटर में मौजूद खिलाड़ियों के लिए यह जीत खास रही।

एनसीओई की कबड्डी खिलाड़ी नितिका चौहान ने कहा कि भारतीय टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीता है। यह पूरे देश और हिमाचल के लिए गौरव का पल है। टीम की इस उपलब्धि से आने वाली पीढ़ी को कबड्डी में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
एनसीओई प्रभारी जेपी शानी ने कहा कि सेंटर के लिए यह गौरव की बात है कि यहां से जुड़ी तीन बेटियों ने भारतीय टीम की स्वर्ण पदक जीत में योगदान दिया। उनकी उपलब्धि से एनसीओई में प्रशिक्षण ले रही खिलाड़ियों का मनोबल भी बढ़ा है।

जीत की खुशी में झूमा ज्योति का गांव
कबड्डी में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही सोलन के कंडाघाट उपमंडल की धंगील पंचायत के जखेड गांव में भी जश्न का माहौल है। भारत को स्वर्ण पदक दिलाने में ज्योति ठाकुर ने अहम भूमिका निभाई। ज्योति के पिता सुरेश ठाकुर ने सोलन में टीवी पर फाइनल मुकाबला देखा, जबकि परिवार ने घर में मैच देखा। भारत की जीत के साथ ही गांव में लोग खुशी में झूम उठे। परिजनों को बधाई देने वालों का तांता लग गया। ज्योति के पिता सुरेश ठाकुर ने बताया कि बेटी ने प्राथमिक विद्यालय धंगील में चौथी से ही खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। स्कूल के समय में ही ज्योति ने कबड्डी की राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था। बाद में उन्होंने साई धर्मशाला में कबड्डी की ट्रेनिंग ली। 

टीम इंडिया के जीतते ही खेत में नाचे भावना के परिजन
खेतों में लहसुन की बिजाई चल रही थी और मोबाइल फोन पर बेटी भावना का फाइनल मुकाबला। भारतीय महिला कबड्डी टीम के ईरान के खिलाफ एशियन गेम्स के फाइनल पर मंडी के बैला गांव में भावना ठाकुर के परिवार की नजरें टिकी थीं। परिवार सुबह ही खेत के काम में जुटा था। जैसे ही भारत ने ईरान को हराकर स्वर्ण पदक जीता, खेतों में खुशी छा गई। बेटी की जीत की खुशी में पिता प्रेम सिंह वहीं नाच उठे। पूरे परिवार ने खेत में ही जश्न मनाया। बड़ी बहन कांता देवी ने कहा कि भावना ने फिर परिवार, मंडी और हिमाचल का मान बढ़ाया है। परिवार को अपनी बेटी पर नाज है। उनकी कामना है कि भावना इसी तरह आगे बढ़ती रहे और देश के लिए उपलब्धियां हासिल करती रहे। 27 वर्षीय भावना गोहर उपमंडल के पंडोह से सटे बैला गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता प्रेम सिंह किसान और माता दासी देवी गृहिणी हैं।

चार भाई-बहनों में सबसे छोटी भावना की बड़ी बहन कांता, बहन पुष्पा और भाई दुनी चंद हैं। माता दासी देवी ने कहा कि बेटी ने पूरी टीम के साथ शानदार प्रदर्शन कर देश के साथ मंडी जिले का नाम रोशन किया है। पिता प्रेम सिंह ने कहा कि भावना की खेल के प्रति लगन, मेहनत और जज्बे का परिणाम अब सामने आया है। भाभी प्रोमिला देवी ने भी बेटी की उपलब्धि पर खुशी जताई।

भावना की शुरुआती पढ़ाई कोट और स्यांज स्कूल में हुई। इसके बाद सिरड़ा इंस्टीट्यूट के छात्रावास में रहकर कनैड स्कूल से 12वीं की पढ़ाई की। वर्ष 2021 में धर्मशाला में कबड्डी प्रशिक्षण लेने के बाद उनके खेल कॅरिअर को नई दिशा मिली। 24 नवंबर 2025 को चीन को हराकर विश्वकप जीतने वाली भारतीय महिला कबड्डी टीम में भी भावना ने अहम भूमिका निभाई थी। अब एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपने बड़े सपने को पूरा कर लिया है।
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कबड्डी छोड़ चुकी थीं भावना, फिर बदला फैसला
वर्ष 2014 में कबड्डी शुरू करने के बाद भावना ने जूनियर नेशनल प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, लेकिन कुछ समय बाद खेल छोड़ दिया। मंडी जिला कबड्डी संघ के नेत्र सिंह और प्रेम ठाकुर उनके घर पहुंचे। उन्होंने पिता प्रेम सिंह की मदद से भावना को दोबारा खेलने के लिए प्रेरित किया। दोनों ने भावना को खेल न छोड़ने की कसम भी दिलाई। इसके बाद भावना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार आगे बढ़ती गईं।



सीएम ने दी बधाई, विजेताओं को मिलेगा ईनाम
मंडी दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भारतीय महिला कबड्डी टीम की हिमाचल की चारों खिलाड़ियों समेत पूरी टीम को स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी। उन्होंने जोगिंद्रनगर के सावन बरवाल को भी शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल पहुंचने पर सभी विजेताओं का स्वागत किया जाएगा और नियमों के तहत सरकार की ओर से ईनामी राशि दी जाएगी।
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