20वें एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाने वाली महिला कबड्डी टीम की कप्तान पुष्पा राणा और साथी खिलाड़ी ज्योति ठाकुर व भावना का धर्मशाला में जोरदार स्वागत किया गया। साई राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र पहुंचने पर युवा खिलाड़ियों और बच्चों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाईं। ढोल-नगाड़ों, डीजे और आतिशबाजी के बीच खिलाड़ियों का स्वागत हुआ। इस दौरान खिलाड़ियों ने सरकार से अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं के लिए स्थायी नौकरी की मांग भी उठाई।
मैदान पर विरोधी टीमों को अपनी दमदार खेल प्रतिभा से मात देने वाली हिमाचल की 'गोल्डन गर्ल्स' जब धर्मशाला लौटीं तो उनके स्वागत में पूरा माहौल जश्न में बदल गया। 20वें एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाने वाली महिला कबड्डी टीम की कप्तान पुष्पा राणा और उनकी साथी खिलाड़ी ज्योति ठाकुर व भावना का धर्मशाला पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया।
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भारतीय खेल प्राधिकरण के राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (साई सेंटर) पहुंचते ही युवा खिलाड़ियों और बच्चों ने अपनी आदर्श खिलाड़ियों का फूल-मालाएं पहनाकर जोरदार स्वागत किया। जिन खिलाड़ियों को अब तक वे मैदान पर खेलते हुए देखते आए थे, उन्हें अपने बीच पाकर युवा खिलाड़ियों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
VIDEO | Dharamshala, Himachal Pradesh: The Indian women's kabaddi team's Asian Games gold medal sparked celebrations at the SAI hostel in Dharamsala on Monday as teammates and staff welcomed skipper Pushpa Rana, Jyoti Thakur and Bhavna Devi on their return. The players were… pic.twitter.com/JfeC1uppDZ
सादगी से पहुंचीं चैंपियन, स्वागत ने बना दिया माहौल खास
स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ी बेहद सादगी भरे अंदाज में साई सेंटर पहुंचीं, लेकिन उनके स्वागत का माहौल किसी बड़े खेल समारोह से कम नहीं था। ढोल-नगाड़ों और डीजे की थाप पर युवा खिलाड़ियों ने जमकर जश्न मनाया। आतिशबाजी के बीच ‘गोल्डन गर्ल्स’ का स्वागत किया गया। बच्चों और उभरते खिलाड़ियों के लिए यह पल इसलिए भी खास था, क्योंकि उनके सामने खेल की वे बेटियां थीं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन किया है। इस गौरवशाली मौके पर खिलाड़ियों की कोच पूजा ठाकुर भी विशेष रूप से मौजूद रहीं। अपनी खिलाड़ियों की उपलब्धि पर उनके चेहरे पर गर्व साफ नजर आया।
स्वर्ण पदक के बाद अब नौकरी की मांग
जश्न और सम्मान के बीच इन खिलाड़ियों ने अपने भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा भी उठाया। कप्तान पुष्पा राणा सहित अन्य खिलाड़ियों ने सरकार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद स्थायी नौकरी देने की मांग की। खिलाड़ियों का कहना है कि अगर उनका रोजगार सुरक्षित हो जाता है तो वे आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर अपना पूरा ध्यान खेल पर लगा सकेंगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतने के बाद अब खिलाड़ियों को अपने भविष्य को लेकर स्थिरता की उम्मीद है।
साई सेंटर के खिलाड़ियों के लिए बनीं मिसाल
धर्मशाला के साई सेंटर में इन स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों का लौटना वहां अभ्यास कर रहे सैकड़ों युवा खिलाड़ियों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं रहा। जिन खिलाड़ियों ने कभी इन्हीं मैदानों पर पसीना बहाकर अपने सपने संजोए थे, उनकी सफलता अब सामने खड़ी थी। ऐसे में पुष्पा राणा, ज्योति ठाकुर और भावना की उपलब्धि साई सेंटर में खेल की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह संदेश भी है कि मेहनत और लगन से पहाड़ की बेटियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का तिरंगा लहरा सकती हैं।
ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी के बीच हुआ यह स्वागत सिर्फ तीन खिलाड़ियों का सम्मान नहीं था, बल्कि हिमाचल की उन तमाम बेटियों के सपनों का जश्न था, जो खेल के मैदान में अपनी पहचान बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं।