धर्मशाला में किताबों के स्टॉल पर लोगों की भीड़।
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सोशल मीडिया और रील्स के बढ़ते चलन के बीच भी युवाओं में किताबें पढ़ने का आकर्षण बरकरार है। खास बात यह है कि किताबें पढ़ने और खरीदने वालों में जेन जी पीढ़ी के युवाओं की अच्छी भागीदारी देखने को मिल रही है। धर्मशाला के पुलिस मैदान में 16 अक्तूबर से चल रहे राज्यस्तरीय दशहरा मेले में लगे पुस्तक स्टॉल पर रोजाना 150 से 200 किताबें बिक रही हैं।
मेले में अन्य दुकानों के बीच पुस्तक स्टॉल युवाओं, बच्चों और साहित्य प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां अंग्रेजी उपन्यासों से लेकर हिंदी साहित्य और बच्चों की कहानियों तक, अलग-अलग विषयों की किताबें उपलब्ध हैं। पाठकों में अंग्रेजी पुस्तकों की मांग अधिक है। इनमें दर्शनशास्त्र, प्रेरणादायक साहित्य, विज्ञान कथाओं, प्रेम कहानियों और मनोविज्ञान से जुड़ी किताबें शामिल हैं।
वहीं, हिंदी साहित्य में भी युवाओं की रुचि देखने को मिल रही है। धर्मवीर भारती का प्रसिद्ध उपन्यास 'गुनाहों का देवता' और 'मुसाफिर कैफे' जैसी किताबें पाठकों को पसंद आ रही हैं। इससे साफ है कि डिजिटल मनोरंजन के विकल्प बढ़ने के बावजूद पाठकों का पुस्तकों से जुड़ाव बना हुआ है।
बच्चों की कॉमिक्स और कहानियों की भी मांग
पुस्तक स्टॉल पर केवल युवा ही नहीं, बल्कि बच्चे भी अपनी पसंद की किताबें खरीदने पहुंच रहे हैं। बच्चों के बीच कॉमिक्स, विक्रम-बेताल की कहानियों और दादी-नानी की कहानियों वाली पुस्तकों की मांग बनी हुई है। मेले में अलग-अलग आयु वर्ग के पाठकों की मौजूदगी पुस्तकों के प्रति रुचि को दर्शाती है।
वेब सीरीज और सोशल मीडिया से बढ़ रही दिलचस्पी
किताबों की लोकप्रियता बढ़ने में फिल्मों, वेब सीरीज और सोशल मीडिया की भी भूमिका सामने आ रही है। किसी चर्चित उपन्यास या कहानी पर फिल्म अथवा वेब सीरीज बनने के बाद दर्शकों में उसकी मूल कहानी और किरदारों को जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है। इससे पुरानी और नई किताबें फिर से पाठकों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं।
पुस्तक विक्रेता धर्मवीर के अनुसार, वह हिमाचल प्रदेश के लगभग सभी बड़े मेलों में पुस्तक स्टॉल लगाते हैं। धर्मशाला दशहरा मेले में प्रतिदिन औसतन 150 से 200 किताबें बिक रही हैं और पाठकों की प्रतिक्रिया सकारात्मक है। उन्होंने बताया कि वेब सीरीज और सोशल मीडिया के चलन से किताबों की मांग प्रभावित हुई है और कुछ हिंदी पुस्तकों की लोकप्रियता भी बढ़ी है।
साहित्य से जुड़ें युवा : मनीषा
धर्मशाला की मनीषा का कहना है कि मुख्यधारा के मीडिया और फिल्मों का किताबों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। युवाओं को साहित्य से जुड़ना चाहिए। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के साहित्यकारों और उनकी रचनाओं को जरूर पढ़ना चाहिए, ताकि स्थानीय साहित्य और संस्कृति को भी बढ़ावा मिल सके।
पुस्तक प्रदर्शनियों से बढ़ता है किताबों का संग्रह
वर्तमान में धर्मशाला में रह रहे उत्तर प्रदेश के निवासी नीलेश को अलग-अलग विषयों की किताबें पढ़ने का शौक है। उनके घर में अपनी छोटी-सी लाइब्रेरी भी है। उन्होंने बताया कि जब भी कहीं पुस्तक प्रदर्शनी लगती है, तो वह नई किताबें खरीदने का अवसर नहीं छोड़ते।
रील्स में किताबें देख खरीदने पहुंचीं प्रांशिका
धर्मशाला की प्रांशिका ने बताया कि सोशल मीडिया पर आजकल कुछ किताबें काफी लोकप्रिय हो रही हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम रील्स में इन किताबों के बारे में देखा था। किताबों के रिव्यू से प्रभावित होकर वह उन्हें खरीदने के लिए पुस्तक स्टॉल पर पहुंचीं।
किताबें पढ़ने से बढ़ता है ज्ञान : आरव कपूर
धर्मशाला के आरव कपूर का कहना है कि हर व्यक्ति को किताबें पढ़नी चाहिए। डिजिटल दुनिया से कुछ समय हटकर किताबें पढ़ने से मानसिक विकास होता है और शब्द ज्ञान भी मजबूत होता है। उनके अनुसार, पढ़ने की आदत व्यक्ति के ज्ञान और समझ को बेहतर बनाने में मदद करती है।