हिमाचल प्रदेश सरकार से बजट जारी न होने के कारण मुख्यमंत्री युवा खेल प्रोत्साहन योजना के तहत इस वर्ष विधायक प्राथमिकता से बनने वाले खेल मैदानों के निर्माण पर ब्रेक लग गई है। कांगड़ा जिले के किसी भी विधानसभा क्षेत्र को इस योजना के तहत धनराशि आवंटित नहीं की गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रस्तावित खेल मैदान और जिम निर्माण की योजनाएं अधर में लटक गई हैं।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्षों तक हर विधानसभा क्षेत्र को मार्च माह में विधायक की अनुशंसा पर 15-15 लाख रुपये की राशि जारी की जाती थी। इस बजट से स्कूल प्रबंधन समितियां, युवा मंडल और ग्राम पंचायतें अपने क्षेत्रों में खेल सुविधाओं का विकास करती थीं। जिला खेल अधिकारी के माध्यम से निदेशालय को भेजे गए आवेदनों पर इस बार बजट की अनुपलब्धता के चलते कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
कांगड़ा जिले में खेल मंत्री गोमा सहित कुल 11 विधायकों ने नए खेल मैदानों और जिम के लिए अनुशंसा की थी। खेल विभाग के सूत्रों के अनुसार, जिला खेल अधिकारी ने इन आवेदनों की जांच कर निदेशालय को भेज दिया है, लेकिन वित्त विभाग से ग्रीन सिग्नल न मिलने के कारण फाइलें आगे नहीं बढ़ पाई हैं। जल्द बजट नहीं मिला तो इस मानसून सीजन में भी खेल मैदानों की हालत नहीं सुधर पाएगी।
धर्मशाला के विधायक सुधीर शर्मा ने कहा कि पिछले वर्ष भी धर्मशाला खेल परिसर में सिंथेटिक अभ्यास स्ट्रिप बनाने के लिए विभाग को डीओ नोट दिया था, लेकिन विधानसभा क्षेत्रों की अनदेखी करते हुए चहेते क्षेत्रों में ही बजट जारी कर दिया। यह सीधे-सीधे पक्षपात और राजनीतिक भेदभाव है। इस वर्ष तो स्थिति और भी शर्मनाक है। किसी भी विधानसभा क्षेत्र को एक रुपये तक जारी नहीं किया गया। यह न केवल प्रशासनिक विफलता है, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ भी है।