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चम्बा: अपराजिता बन हर मुश्किल का सामना कर सकती है महिला

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औद्योगिक प्रशिक्षण संंस्थान चंबा में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में किया जागरूक
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संवाद न्यूज एजेंसी चंबा। स्वस्थ शरीर और मजबूत इरादे महिलाओं को अपराजिता बनाएंगे। महिला अपराजिता बनकर हर मुश्किल का सामना कर सकती है और किसी भी मुकाम को हासिल कर सकती है। यह बात अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित 100 मिलियन स्माइल्स अपराजिता कार्यक्रम के दौरान औद्योगिक प्रशिक्षण संंस्थान चंबा में प्रधानाचार्य विपिन शर्मा ने कही। उन्होंने कहा कि किशोरियों को खुद को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार लेना चाहिए। इससे जहां उनका शरीर मजबूत होगा, वहीं शरीर मजबूत होने से उनके इरादे भी मजबूत बनेंगे। ऐसेे मजबूत महिला को कोई भी परास्त नहीं कर सकता इसलिए हरेक महिला को स्वस्थ शरीर के साथ मजबूत इरादे रखने चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को खुद की योग्यता की पहचान कर आगे बढ़ना चाहिए। जीवन में आगे बढ़ने के लिए एक लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। उसी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्हें भरसक प्रयास करना चाहिए। इसके अलावा महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में भी पूरी जानकारी होनी चाहिए। कहा कि आज जिस तरह लड़कियों का शिक्षित होना जरूरी है, उसी तरह स्वस्थ रहना भी आवश्यक है। अस्वस्थ शरीर सफलता के मार्ग में रुकावटें पैदा करता है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को साइबर क्राइम से लेकर महिला अपराध से बचने की जानकारी भी दी।
संस्थान के अध्यापक दिनेश कुमार डोगरा ने कहा कि प्रत्येक लड़की में कोई न कोई योग्यता होती है। उसी योग्यता को पहचानने की जरूरत है। महिलाओं को अपने विरुद्ध होने वाले अपराधों के प्रति आवाज उठानी चाहिए। लड़कियों को निडर बनना चाहिए। किसी भी गलत बात का विरोध करना चाहिए।
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अध्यापक वैद प्रकाश ने बताया कि सरकार ने युवतियों के लिए कई योजनाओं को शुरू किया है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को बैंक से संबंधित होने वाले साइबर क्राइम से सावधान किया। कहा कि बदलते दौर में फिजूलखर्ची बढ़ी है, इससे बचकर रहना चाहिए।

अमर उजाला का अपराजिता कार्यक्रम काफी सराहनीय अभियान है। इससे महिलाओं को उनके अधिकारों को जानने का मौका मिल रहा है। अमर उजाला को ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी करवाने चाहिए। -अंकिता ठाकुर।

मैं चाहती हूं कि अमर उजाला की ओर से ऐसे कार्यक्रम भविष्य में भी करवाए जाएं। इससे महिलाएं जागरूक होकर आत्मनिर्भर बनेंगी। कई महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में ही पता नहीं होता। इससे वे कई परेशानियां झेलती हैं। -साक्षी देवी।

इस दौर में महिलाओं के अधिकारों को समझना बहुत जरूरी है। महिला कहीं न कहीं मानसिक प्रताड़ना का शिकार होने के कारण पीछे रह रही है। ऐसे कार्यक्रमों से महिलाओं को नई उर्जा मिलती है और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। - किरण कुमारी।
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ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को जागरूक बनाते हैं। उन्हें अपने हक की लड़ाई कैसे लड़नी चाहिए, इसके बारे में भी यह कार्यक्रम प्रेरणास्त्रोत बनते हैं। ऐसे कार्यक्रम अन्य संस्थाओं को भी आयोजित करने चाहिए। -शबनम
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