भटियात में प्रभावित क्षेत्र के दौरे के दौरान टैंट में रह रहे प्रभावितो से बात करने जाते मुख्यमंत?
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सिहुंता (चंबा)। साहब! खून पसीने की कमाई और पाई-पाई जोड़कर तैयार किए गए मकान भारी बारिश की भेंट चढ़ गए हैं। बारिश के कहर के बीच गनीमत यह रही कि जान बचाने में परिवार के सदस्य कामयाब रहे अन्यथा सब कुछ तबाह हो जाता। सिहुंता उपमंडल के ककरोटी घट्टा में पहुंचे मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष नलेड़ निवासी प्रभावित बीना देवी पत्नी सुंका राम, स्वर्णा देवी पत्नी देसराज ने हाथ जोड़कर मदद की गुहार लगाते हुए यह बात कही।
इस दौरान बुजुर्ग स्वर्णा देवी अपनी व्यथा सुनाते-सुनाते भावुक हो उठीं। रुंधे गले से उन्होंने मुख्यमंत्री से अब फिर से आशियाना बसाने के लिए उपयुक्त जमीन और उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई। प्रभावितों ने बताया कि उनके परिवार के सदस्य खेतीबाड़ी कर गुजर-बसर करते हैं। इस प्रकार की आपदा के बारे में उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था लेकिन 18 अगस्त को हुई भारी बारिश के कहर से कइयों के घर जमींदोज होने से कई परिवार पूरी तरह से बेघर हो चुके हैं। कई परिवारों की उपजाऊ भूमि पानी में बह गई है। इससे अब प्रभावित परिवारों को गुजर-बसर की चिंता दिन-रात सता रही है।
ग्राम पंचायत जोलना के गांव तरटी खोपरू निवासी प्रभावित लीला देवी पत्नी मणि राम और प्रभावित निर्मला देवी पत्नी कृष्ण चंद ने बताया कि भारी बारिश ने उनके गांवों में भूचाल ला दिया। उस घड़ी को याद कर उनके रौंगटे खड़े हो जाते हैं। भारी बारिश के बीच चारों तरफ बचाओ-बचाओ के चीखें अभी भी उनके कानों में गूंज रही हैं। घर, जमीनें बहने के बाद राहत और बचाव कार्य के तहत भटियात के विधायक के निर्देशानुसार उन्हें ककरोटी घट्टा में बनाए गए अस्थायी टेंटों में ठहराया गया है। यहां पर शासन-प्रशासन और पंचायत की ओर से उनके खाने-पीने की व्यवस्था की गई है। ग्रामीण उस भयावहघड़ी से इतने सहम गए हैं कि दिन के समय भी क्षतिग्रस्त घरों में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
अब सरकार और प्रशासन से बस यही गुहार है कि प्रभावितों को उपयुक्त स्थान पर जमीन और उचित मुआवजा देकर उनकी मुश्किलों को कुछ अदद कम किया जाए। ककरोटी घट्टा में बनाए अस्थायी बेस कैंप में हटली, थुलेल, बलाना और काकरोटी पंचायतों के प्रभावित रह रहे हैं।