मैहला (चंबा)। एक तरफ न्यायालय के निर्देशानुसार बालिका आश्रम में पुरुषों के प्रवेश पर प्रतिबंध है, दूसरी ओर कस्तूरबा गांधी बालिका आश्रम मैहला में पुरुष अध्यापकों की कार्यशाला चल रही है।
यह कार्यशाला पांच दिन से चल रही है। हालांकि, न्यायालय के निर्देशानुसार बालिका आश्रम से पुरुष स्टाफ को पहले ही हटा दिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने बालिका आश्रम में पुरुषों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है। बताया जा रहा है कि रोजाना 40 पुरुष अध्यापक बालिका आश्रम में चल रही कार्यशाला में भाग लेने के लिए पहुंचते हैं। हैरानी की बात है कि इस ओर शिक्षा विभाग ने भी ध्यान नहीं दिया है। ग्रामीणों में रोष है कि जब पुरुष अध्यापकों पर प्रतिबंध है तो यहां कार्यशाला क्यों करवाई जा रही है। ग्रामीणों में कैलाश कुमार, अमित कुमार, विनोद कुमार, रोशन लाल और किशोरी लाल का कहना है कि आश्रम में पूर्व में तैनात पुरुष अध्यापकों को हटा दिया है। न्यायालय के आदेश हैं कि बालिका आश्रम में पुरुषों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। बावजूद इसके पांच दिन से कार्यशाला चल रही है। स्कूल प्रधानाचार्य रंजना का कहना है कि यह बालिका आश्रम उनके दायरे में आता है। इसलिए उन्होंने कार्यशाला का आयोजन किया है। कहा कि पुरुषों का रात को ठहरने पर प्रतिबंध है।उधर, कार्यवाहक प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक सुमन कुमार मिन्हास ने कहा कि इस बारे में जानकारी मिली है। बालिका आश्रम में भविष्य में अब पुरुष स्टाफ के लिए कोई भी कार्यशाला नहीं करवाई जाएगी। इस बारे में स्कूल प्रबंधन को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
पंकज सलारिया