डलहौजी (चंबा)। सदर बाजार डलहौजी के लक्ष्मी नारायण मंदिर हाल में रामलीला की दूसरी रात्रि की शुरुआत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती से हुई। इसके बाद पहला दृश्य राजा दशरथ के दरबार का दिखाया गया।
दरबार में श्रवण कुमार फरियाद लेकर आते हैं। कहते हैं उनके माता-पिता बहुत बूढ़े हैं। दोनों आंखों से अंधे हैं। अगर आपके दरबार में कोई हकीम और वैद्य है तो उसे भेज दें। इस दौरान वशिष्ठ ऋषि श्रवण से कहते हैं कि उनके माता-पिता का इलाज कोई वैद्य नहीं कर पाएगा। इसके लिए माता-पिता को चार धाम की यात्रा करवाओ तब आखों की रोशनी वापस आएगी। श्रावण माता-पिता को चार धाम की यात्रा के लिए ले जाते हैं। रास्ते में माता-पिता को प्यास लगती है। श्रवण लौटे में जल भरते हैं तो राजा दशरथ कोई जानवर समझकर तीर चलाते हैं। इससे श्रवण घायल हो जाते हैं। श्रवण के पास आकर पछतावा करते हैं तो श्रवण उनसे माता-पिता की प्यास बुझाने की बात कहते हैं। इसके बाद श्रवण की मृत्यु हो जाती है। जब दशरथ श्रवण के माता-पिता के पास जाते हैं। उन्हें पता चलता है कि दशरथ ने उनके बेटे की हत्या की है तो श्रवण के पिता शांतनु दशरथ को श्राप देते हैं।