चंबा। चमेरा-3 विश्रामगृह में कार्यरत 24 कामगारों को अप्रैल का वेतन अभी तक नहीं मिल पाया है। इसके बारे में ठेकेदार को कई बार अवगत करवाने पर अक्सर वह टालमटोल कर रहा है। चमेरा-तृतीय पावर हाउस में कार्यरत 15 कर्मचारियों (सात कैंटीन और आठ कर्मी सिविल विभाग में कार्यरत) को जनवरी से लेकर 12 मार्च तक का वेतन नहीं मिल पाया है।
यह आरोप चमेरा पावर स्टेशन वर्कर यूनियन संबंधित सीटू के प्रधान अयूब खान, सचिव राकेश कुमार, वरिष्ठ उपप्रधान फारूख सहित अन्य सदस्यों विपिन ठाकुर, परविंद्र और सुशील कुमार ने लगाया है। उन्होंने बताया कि ठेकेदार दिल्ली से संबंध रखता है। इसके बारे में चमेरा-तृतीय के महाप्रबंधक प्रभारी समेत सिविल विभाग के एचओडी से बात की गई लेकिन अभी तक कोई भी उचित प्रयास नहीं हो पाए हैं। आरोप लगाया कि फील्ड हॉस्टल में कार्यरत संविदा कर्मियों से 12 से 15 घंटे काम लिया जाता है। इसके लिए न तो उन्हें ओवरटाइम मिलता है और न ही उसके बदले में कोई छुट्टी मिलती है। इन कर्मियों को काम के आठ घंटे से अधिक काम करने पर या तो ओवरटाइम दिया जाए या बदले में अवकाश प्रदान करवाया जाए। कहा कि परियोजना में वतन हर माह की सात तारीख को देने की तिथि जिला श्रम अधिकारी की ओर से निर्धारित की जाए। बताया कि सभी पावर स्टेशनों में कारखाना अधिनियम के तहत पंजीकृत हैं लेकिन अभी तक इन अधिनियमों को पूर्ण रूप से लागू नहीं किया गया। उन्होंने मांग की है कि सभी परियोजनाओं में कारखाना अधिनियम के तहत संविदा कर्मियों को वेतन, छुट्टियां, बोनस, ग्रेच्युटी सहित अन्य तमाम सुविधाएं दिलवाने के लिए संबंधित परियोजना अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। चमेरा-द्वितीय और चमेरा तृतीय जल विद्युत परियोजना के करीबन 400 संविदा कर्मी अपनी सेवाएं विभिन्न विभागों में दे रहे हैं। इन कर्मियों ने सोमवार को अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर एडीएम अमित मेहरा को ज्ञापन सौंप कर अवगत करवाया।