चंबा। भारी बारिश के दौरान जहां जिला मुख्यालय के सभी संपर्क मार्ग बंद हो गए हैं तो इसी बीच चंबा-तीसा मार्ग पर एक गर्भवती महिला रात पर गत्ति घार के पास फंसी रही। रविवार रात को गर्भवती को प्रसव पीड़ा शुरू हुई। महिला को पहले ही बता दिया गया था कि उसकी हाई रिस्क डिलीवरी होगी। इसके चलते परिजन महिला को निजी गाड़ी के जरिये टांडा लेकर रवाना हुए लेकिन रात करीब 12:00 बजे उनकी गाड़ी गत्ति घार के पास फंस गई। सोमवार सुबह 7:00 बजे महिला के परिजनों ने जिला प्रशासन के साथ संपर्क किया।
प्रशासन की ओर से खंड चिकित्सा अधिकारी पुखरी को इसके बारे में सूचना दी गई और महिला की मदद करने को कहा गया। सुबह 7:00 बजे खंड चिकित्सा अधिकारी ने पीएचसी पुखरी की टीम को तुरंत गत्ति घार में जाकर महिला के स्वास्थ्य की जांच करने को कहा। सूचना मिलते ही डॉक्टर और उनकी टीम तुरंत गत्ति घार पहुंच गई। डॉक्टर ने महिला की पूर्ण रूप से जांच की तो पाया कि उसका ब्लड प्रेशर काफी अधिक था। इससे उसकी डिलीवरी जोखिम भरी थी लेकिन सड़क बंद होने के कारण महिला को चंबा मेडिकल कॉलेज या टांडा भी नहीं भेजा जा सकता था। महिला की तबीयत खराब हो रही थी जिसे देख डॉक्टर और उनकी टीम ने महिला को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पुखरी पहुंचाया। यहां पर डॉक्टर और स्टाफ नर्सों ने अपने अनुभव के बलबूते महिला का प्रसव करवाने का फैसला लिया। परिवार इस बात से चिंतित था कि जिस प्रसव को वह मेडिकल कॉलेज चंबा में नहीं करवा रहे थे। वही प्रसव एक छोटे से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कैसे होगा लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर सुरेंद्र भाटिया और उनकी टीम ने महिला का सुरक्षित प्रसव कर दिखाया। अब जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। परिवार ने इस खुशी में पीएचसी के स्टाफ को भेंट स्वरूप नकद राशि देनी चाही लेकिन स्टाफ ने उसे नहीं लिया और इसे अपना फर्ज बताया।
खंड चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर नवदीप राठौर ने बताया कि महिला की हाई रिस्क डिलीवरी थी जो पीजीआई में अपनी जांच करवाकर चंबा लौटी थी। इमरजेंसी को देखते हुए पीएचसी स्टाफ ने महिला का प्रसव कर दिखाया। इसके लिए पूरी टीम बधाई की पात्र है।