चंबा। रंगों के समावेश और चित्र बनाकर खुशी तलाशने वाले परमार भुटोरी के रमन को परिजनों का प्यार न मिलने से वह अवसाद में चला गया।
माना जा रहा है कि परिजनों के मिलकर बातचीत न करने और उनसे प्यार न मिलने से दुखी होकर उसने फंदा लगाकर इहलीला खत्म करने जैसा कदम उठा लिया। उधर, परिजनों की भी लाडले से न मिलने के पीछे गरीबी उनकी मजबूरी रही या दूरदराज क्षेत्र में रहने के चलते घर-परिवार संभालने की चिंता के बीच लाडले से नहीं मिल पाए, इस बारे में कुछ भी कह पाना मुश्किल है। परिजनों के भविष्य में आगे बढ़ने के लिए पेंटिंग को त्याग कर पढ़ाई की ओर पढ़ने की सीख भी उसे गलत लगी। इसका प्रमाण रहा कि अवसाद में चल रहे किशोर ने खौफनाक कदम उठा लिया।
एकलव्य हॉस्टल में रहने वाला हंसमुख स्वभाव के रमन पढ़ाई में अव्वल रहने के साथ-साथ चित्र बनाने में भी माहिर था। हॉस्टल के दरवाजों और स्कूल की दीवारों बनाए वेलकम समेत अन्य चित्र इसका उदाहरण हैं। इतना ही नहीं, बीते वर्ष विद्यालय स्तर पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में भी रमन ने प्रथम स्थान प्राप्त कर इनाम जीता था। ऐसे में अवसाद में चल रहे रमन की ओर से उठाए गए कदम को लेकर मनोरोग विभाग के विभाध्यक्ष डॉ. नीरज शर्मा ने भी परिजनों से बच्चों पर अपनी इच्छाओं को न थोपने की बात कही है। उन्होंने साफ किया है कि अभिभावक बच्चों को पढ़ाई के लिए दबाव न डालें। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों से एक बार अवश्य ये पूछें कि वह किस क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहते हैं। अभिभावकों को बच्चों को उनके पसंदीदा क्षेत्र में आगे बढ़ने को लेकर प्रोत्साहित करना चाहिए, जिससे वे मानसिक दबाव में आकर किसी प्रकार का कोई भी गलत कदम न उठाएं।