चंबा। युवाओं को नशीली दवाई बेचने वाले दवा विक्रेता की संपत्ति की औषधि नियंत्रण प्रशासन जांच करवाने की योजना बना रहा है। दवा विक्रेता के पास जांच के दौरान 66 हजार रुपये नकद मिले थे।
इसके बाद विभाग अब पुख्ता कर रहा है कि विक्रेता ने युवाओं को अवैध तरीके से नशीली दवाई बेचकर कितनी संपत्ति जमा की है। स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद दवा विक्रेताओं समेत नशीली दवाइयां बेचने वालों और खरीद-फरोख्त करने वालों में हड़कंप मच गया है।
जिले के युवाओं को नशीली दवाओं की लत लगाने वालों और नशीली दवाओं को बेचने और उनकी खरीद-फरोख्त करने वालों पर स्वास्थ्य विभाग का डंडा चला है। स्वास्थ्य विभाग की टीम जिले भर में औचक निरीक्षण कर बिना बिल दवाइयां बेचने वालों पर शिकंजा कस रही है। बीते दिन शहर के एक मोहल्ला स्थित कथित दवा विक्रेता पर युवाओं को नशीली दवाओं की ओर धकेलने संबंधी शिकायतें मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने औचक निरीक्षण कर दवाइयां बरामद कीं। मौके से स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 66 हजार रुपये भी बरामद किए। इसका मेडिकल स्टोर संचालक मौके पर कोई बिल नहीं दिखा पाया। हालांकि, मेडिकल स्टोर संचालक ने इसे एक सप्ताह की बिक्री बताया है। टीम ने मेडिकल स्टोर के संचालक को दवाइयाें के बिल विभाग के पास जमा करवाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस संबंध में ड्रग्स लाइसेंस अथॉरिटी धर्मशाला से अगले निर्देश मिलने तक मेडिकल स्टोर को सील किया गया है। अब औषधि नियंत्रण प्रशासन दवा विक्रेता की संपत्ति की भी जांच करवा सकता है।
उधर, स्टेट ड्रग कंट्रोलर मनीष कपूर ने बताया कि युवा पीढ़ी को नशीली दवाओं की आदत बनाने वाली दवाइयां बेचने वालों को कदापि बख्शा नहीं जाएगा। दवा विक्रेता की दुकान को सील करने के बाद अब उसकी आगामी समय में संपत्ति की भी जांच करवा सकता है।