चंबा। जिले के 60 स्वास्थ्य उपकेंद्रों में बच्चों और गर्भवतियों का टीकाकरण नहीं हो रहा है। इसकी वजह से बच्चों और गर्भवतियों को टीकाकरण के लिए चंबा या अन्य स्वास्थ्य संस्थानों की दौड़ लगानी पड़ रही है। स्वास्थ्य उपकेंद्रों में स्वास्थ्य कार्यकर्ता नहीं होने से ताले लटके हैं। सरकार और विभाग इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठा रहे हैं। छोटे बच्चों को जन्म के बाद हेपेटाइटिस बी, पोलियो और निमोनिया से बचाने के लिए टीके लगाए जाते हैं। ऐसे टीकाकरण की व्यवस्था स्वास्थ्य उपकेंद्रों में रहती है। अधिकतर स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर ताले लटके होने से ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान प्रभावित हो रहा है। कई बच्चे बीमारी की चपेट में भी आ रहे हैं। हाल ही में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रही बच्चों की स्वास्थ्य जांच में कई मामले सामने आए हैं। कई बच्चे चलने में असमर्थ तो कई बच्चे अन्य बीमारियों से ग्रसित मिले। इसका कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद रहना बताया जा रहा है। जन्म के उपरांत बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण न होना कई प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकता है। चंबा जिला में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के कंधों पर दो से तीन स्वास्थ्य उपकेंद्रों का जिम्मा है। विभाग के पास स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भारी कमी है। यही कारण है कि अधिकतर स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद हैं। विभाग इसके बारे में कई बार सरकार को अवगत करवा चुका है। पंचायत प्रतिनिधियों और लोगों ने इन उपकेंद्रों को खोलने की मांग की है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर जालम भारद्वाज ने बताया कि जिला में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कमी है। बच्चों और महिलाओं का टीकाकरण प्रभावित न हो, इसके पुख्ता प्रबंध किए हैं। स्वास्थ्य कार्यकर्ता सप्ताह में तय तिथि के अनुसार विभिन्न उपकेंद्रों में टीकाकरण कर रहे हैं। बंद पड़े उपकेंद्रों को खोलने को लेकर सरकार से स्टाफ की मांग की गई है।