चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा से निकाले 150 आउटसोर्स कर्मचारी मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के मौखिक फरमानों से तल्ख हो उठे हैं। आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ के बैनर तले आउटसोर्स कर्मी उपायुक्त से मिले। उन्होंने उपायुक्त डीसी राणा के माध्यम से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजकर उनके लिए स्थायी नीति बनाने और कम से कम एक वर्ष का ड्यूटी विस्तार प्रदान करने की मांग की है।
आउटसोर्स कर्मचारी महासंघ चंबा के अध्यक्ष ललित शर्मा, सचिव विजय, महिला विंग की अध्यक्ष रीना ठाकुर, उपप्रधान रीता कुमारी आदि ने कहा कि मेडिकल कॉलेज चंबा से कोरोना काल में रखी गईं स्टाफ नर्सें, लैब तकनीशियनों और कर्मचारियों को मौखिक तौर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने निर्देश देकर मंगलवार से ड्यूटी पर न आने के निर्देश दिए गए जो कदापि न्यायोचित नहीं है। बताया कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन तानाशाही का रवैया अपना रहा है। उन्होंने सरकार और मुख्यमंत्री से मांग की है कि कर्मचारियों को शीघ्र काम पर वापस रखा जाए। क्योंकि इन कर्मचारियों ने उस समय काम किया है जब एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को छूने से भी डरता था।
मेडिकल कॉलेज से निकाले गए आउटसोर्स कर्मचारियों अजहर शेख, सुनील कुमार, अर्शा बडोतरा, सीमा सेठी, पूजा, वनिता, कुलसुुमा, काजल, मीना, कानन, सिखा, मंजुला, किरण आदि ने बताया कि वैश्विक महामारी के दौरान जहां लोग अपने घरों में कैद रहे तब वे अपने बच्चों और परिवार को छोड़ कर सेवाएं देने के लिए 24 घंटे तैनात रहे। अब कोरोना काल खत्म होने के बाद आउटसोर्स कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है जो सही नहीं है। सरकार से मांग है कि सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को डयूटी पर दोबारा बुलाया जाए। साथ ही हर माह उन्हें नौकरी जाने का भय लगा रहता है। सरकार को चाहिए कि तीन-तीन माह का ड्यूटी विस्तार देने के बजाय सरकार उन्हें एक वर्ष का ड्यूटी विस्तार दे। कहा कि नौकरी छिनने से उनके परिवारों पर आर्थिक संकट के बादल छा गए हैं। कहा कि 2020 में महामारी के दौरान उनकी सेवाएं ली गईं। बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों का कार्यकाल 31 मार्च को खत्म हुआ है तो इसके बारे में उन्हें कोई भी लिखित में आदेश नहीं मिले हैं। बावजूद इसके सोमवार को घर जाने के आदेश जारी किए गए हैं।