चुराह (चंबा) ग्राम पंचायत दियोला के शालुई, घेवा, कुंडोली, चैंजला, धनयोगा, भंगोड़ी और फनोता गांवों के बाशिंदे चांजू नाले पर बने अस्थायी पुल से आवाजाही करने के लिए विवश हैं। सर्दियों और बरसात के दिनों में ग्रामीणों की मुश्किलें उस समय और बढ़ जाती हैं जब अस्थायी पुल जलप्रवाह में बह जाता है। हैरानी की बात है कि चांजू नाला पर 14 वर्ष पहले टूटे लकड़ी के पुल के स्थान पर लोक निर्माण विभाग की ओर से नए पुल का निर्माण नहीं करवा पाया है। इसके चलते ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डाल कर चांजू नाले को पार करके सड़क तक पहुंच रहे हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2009 में लोक निर्माण विभाग की ओर से चांजू सड़क निर्माण के दौरान द्रभाला पुल पर पत्थर गिरने से पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद नाले में बना लकड़ी का पुल बरसात के समय पानी के तेज बहाव में बह गया। विभाग ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया था कि जल्द पुल का निर्माण करवा दिया जाएगा लेकिन आज तक विभाग नया पुल नहीं बनवा पाया है।
गौरतलब है कि स्थानीय ग्रामीणों को बीमारों और गर्भवती महिलाओं को पालकी में उठाकर नाला पार करके ही स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना पड़ता है।
ग्रामीणों चैन लाल, डेलो राम, तिलक राज, बेदी व्यास आदि का कहना है कि रोजाना भेड़-बकरियों को चराने के लिए नाले के दूसरी तरफ जाना पड़ता है। इसके चलते कई भेड़-बकरियां पानी के तेज बहाव में बह चुकी हैं। इससे उनका काफी नुकसान हो रहा है। बताया कि ग्रामीणों के लिए यही एकमात्र आवाजाही का रास्ता है। यहां पर कभी भी दुर्घटना हो सकती है। कहा कि नाले पर पुल बनने से ग्राम पंचायत दियोला, चांजू के शालुई, घेवा, कुंडोली, चैंजला, धन्योता, भंगोड़ी और फनोता गांवों की 2,500 आबादी लाभान्वित होगी।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता जोगिंद्र कुमार ने बताया कि मामला उनके ध्यान में नहीं है। कहा कि अगर पुल टूटा है तो उसका निर्माण कार्य करवा दिया जाएगा।