चंबा। देश की रीढ़ कहे जाने वाले किसानों-बागवानों को अप्रैल गहरे जख्म दे गया। मौसम की मार से किसानों-बागवानों को 138 लाख की चपत लगी है। खेतों में गेहूं, मटर, सरसों और जौ की फसल तबाह हो गई है। जिलेभर के बागवानों के बगीचों में लगी फलदार फसल भी ओलावृष्टि और मूसलाधार बारिश की भेंट चढ़ गई है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो जिले में हुए नुकसान का आकलन तैयार कर विभागीय आलाधिकारियों को भेज दिया गया है।
जिले के 90 प्रतिशत भूभाग पर खेतीबाड़ी और बगीचे लगाकर ग्रामीण अपने परिवारों का भरण-पोषण करते हैं लेकिन अप्रैल में आसमान से बरसी आफत ने उनकी मुसीबतों को बढ़ाकर रख दिया है। जिले के तीसा, सलूणी, भरमौर के क्षेत्रों में किसानों के खेतों में लहलहा रही गेहूं, मटर, सरसों और जौ की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। कृषि विभाग की ओर से अपने स्तर पर इसका आकलन तैयार करवाकर निदेशालय भिजवा दिया गया है। वहीं, जिले के बागवानों को मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि से करीब 83 लाख की चपत लगी है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक कुलदीप कुमार धीमान ने बताया कि मूसलाधार बारिश से तीसा, सलूणी, भरमौर में किसानों की गेहूं, मटर, सरसों और जौ की फसल को नुकसान पहुंचा है। इसका आकलन तैयार कर आलाधिकारियों को भेजा गया है।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजीव चंद्रा ने बताया कि जिला के बागवानों को अमूमन 83 लाख का नुकसान हुआ है।