चंबा। जिले के थैलेसीमिया मरीजों को पांच दिन की दवाई लेने के लिए 1000 से लेकर 2000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इन मरीजों को मेडिकल कॉलेज चंबा में थैलेसीमिया की दवाई नहीं मिल पा रही है। जबकि प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को यह दवाई मुफ्त उपलब्ध करवाई जा रही है। प्रदेश में चंबा मेडिकल कॉलेज एक ऐसा काॅलेज है जहां उपचार करवाने वाले थैलेसीमिया के मरीजों को उपचार से संबंधित दवाई लेने के लिए भटकना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि टांडा या पीजीआई से अभिभावक अपने बीमार बच्चों की दवाई लेने जा रहे हैं। इससे उन पर आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। दवाई को चंबा में उपलब्ध करवाने के लिए अभिभावक कई बार मेडिकल कॉलेज प्रशासन से मांग कर चुके हैं लेकिन अभी तक उन्हें कोई राहत नहीं मिल पाई है।
थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को समय पर दवाई न दी जाए तो उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। कई बच्चे ऐसे हैं जो दिन में दवाई की एक गोली खाते हैं तो कई बच्चों को दिन में दो गोलियां दवाई की खानी पड़ती हैं। हैरानी इस बात की है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग इन मरीजों की समस्या का समाधान करने की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। कुछ दिन पहले स्वास्थ्य मंत्री ने मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था लेकिन उन्होंने मेडिकल कॉलेज में दवाइयों की कमी को पूरा करने की दिशा में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी तरह कई अन्य नेता भी मेडिकल कॉलेज का निरीक्षण करने तो पहुंचते हैं लेकिन मरीजों को पेश आने वाली इस प्रकार की गंभीर समस्याओं के निदान को लेकर ध्यान नहीं देते। प्राचार्य डॉक्टर पंकज गुप्ता ने बताया कि उनके ध्यान में यह मामला लाया गया है। जल्द दवाई को मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध करवाने की व्यवस्था करवाई जाएगी।