भरमौर (चंबा)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होली एक चिकित्सक के सहारे चला हुआ है। इसके चलते क्षेत्र के मरीजों को यहां रात्रि सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। दिन के समय ड्यूटी देने के उपरांत चिकित्सक शाम को आराम करने के लिए अपने आवास में चला जाता है। रात को ड्यूटी देने के लिए सीएचसी में अन्य चिकित्सक की व्यवस्था नहीं है। करीब एक दर्जन पंचायतों के लोग अपनी बीमारी का इलाज करवाने के लिए सीएचसी होली में पहुंचते हैं लेकिन जब उन्हें शाम को वहां पर कोई चिकित्सक नहीं मिलता तो उन्हें मजबूरन 30 किलोमीटर दूर भरमौर या 70 किलोमीटर दूर चंबा की दौड़ लगानी पड़ती है। भरमौर में भी चिकित्सकों की कमी चल रही है। इसके चलते मरीज होली में चिकित्सक नहीं मिलने की स्थिति में सीधे चंबा का रुख करते हैं।
स्थानीय लोगों हरीश कुमार, परस राम, चैन लाल, देसराज, प्रताप चंद, किशोर और मनोज कुमार ने बताया कि होली क्षेत्र भोगोलिक दृष्टि से काफी विपरीत है। यहां के लोगों का जीवन पहले ही कठिन है। ऐसे में यदि उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी नहीं मिलें तो उनकी मुश्किलें और भी बढ़ जाती हैं। इसलिए सरकार को लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए सीएचसी में स्वीकृत चिकित्सकों के सभी पदों को भरना चाहिए। इस सीएचसी पर ग्राम पंचायत गरौंडा, न्याग्रां, बजोल, दियोल, कुलेठ, कुठेड़, सरां, क्वारंसी, लांबू, चन्हौता सहित अन्य पंचायतों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं के लिए निर्भर करते हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होली में तीन चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन अभी तक सरकार ने यहां एक ही पद भरा है। अन्य दो स्वीकृत पद एक साल से खाली पड़े हैं जिन्हें भरने के लिए सरकार और विभाग कोई भी सकारात्मक कदम नहीं उठा रहे हैं। यही कारण है कि होली क्षेत्र के लोगों को रात के समय सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
खंड चिकित्सा अधिकारी भरमौर डॉक्टर शुभम भंडारी ने बताया कि सीएचसी होली में चल रही चिकित्सकों की कमी के बारे में उच्चाधिकारी को अवगत करवा दिया गया है। जल्द खाली पद भरे जाने की उम्मीद है।