चंबा। नगर परिषद चंबा के वार्डों में बीपीएल सूची से धन्नासेठ नहीं हट पाए हैं। इस वजह से नया सर्वे भी लटक गया है।
शहर के 11 वार्डों में बीपीएल सूची संशोधित करने और नया सर्वे करने के लिए नगर परिषद ने कई बार निदेशालय में प्रस्ताव भेजे हैं, लेकिन न तो प्रस्ताव को स्वीकृति मिली है और न ही वार्ड पार्षद बीपीएल सूची में शामिल कार, कोठी वालों की रिपोर्ट दर्ज करवा रहे हैं। इससे बीपीएल में शामिल करने वाले आवेदन भी लंबित हैं। सर्वे के न होने से नगर परिषद को भी इस बारे की जानकारी नहीं है कि बीपीएल सूची में धन्नासेठ भी शामिल हैं। नगर परिषद चंबा की बात की जाए तो यहां वर्तमान में करीब 907 बीपीएल सूची में परिवार शामिल हैं।
हैरानी की बात है कि वर्ष 2004 के बाद एक बार भी गरीब लोगों को बीपीएल सूची में शामिल करने के लिए सर्वे नहीं हो पाया है, जबकि नगर परिषद के मुताबिक हर पांच साल बाद सर्वे किया जाता है। बीस सालों से सर्वे लटका है। ऐसे में गरीब परिवारों की जगह कार, कोठी वाले ही बीपीएल का लाभ उठा रहे हैं। इससे वार्ड पार्षदों की भी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। नगर परिषद ने वार्ड पार्षदों को बीपीएल सूची से पुराने नाम हटाने का जिम्मा सौंपा था, जो बीपीएल का लाभ उठा चुके हैं।
गौरतलब है कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों को नगर परिषद बीपीएल सूची में शामिल करती है। इसके लिए नगर परिषद की टीम सर्वे करती है। वर्ष 2004 में इसका सर्वे हुआ था। इसमें गरीब परिवारों का आंकड़ा एकत्रित कर बीपीएल सूची में उन्हें शामिल किया था। इसमें अब कुछ परिवार कार, कोठी होने के बाद भी अपना नाम नहीं कटवा रहे हैं। वर्तमान में लगभग दस से अधिक गरीब परिवारों के बीपीएल में शामिल होने के लिए आवेदन आए हैं।
नगर परिषद की अध्यक्ष नीलम नैय्यर ने कहा कि कई बार हाउस की बैठक में निदेशालय को बीपीएल सर्वे करने के लिए प्रस्ताव भेजा है, लेकिन आज तक स्वीकृति नहीं मिली है। वार्ड पार्षदों से भी बीपीएल से नाम काटने की रिपोर्ट नहीं आ रही है।