चंबा। तबादला होने के बाद भी कुछ शिक्षक गृह पंचायत के स्कूल को छोड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं। वे तबादला रुकवाने के लिए कई जुगाड़ लगा रहे हैं।
तबादला आदेश होने के बाद स्कूल से शिक्षकों को दो से तीन दिन में रिलीव होना होता है, लेकिन छह से सात दिन बाद भी उन्हें रिलीव नहीं किया जा रहा है। इसका उदाहरण शिक्षा खंड मैहला-एक में देखने को मिला। यहां अपनी ही पंचायत के स्कूल में सात साल से सेवाएं दे रहे शिक्षक का जब सरकार ने तबादला किया तो शिक्षक ने रिलीव होकर दूसरे स्कूल में ज्वाइन करने के बजाय तबादला रुकवाने के लिए जुगाड़ शुरू कर दिया। शिक्षक राजनीतिक पहुंच का भी लाभ उठाने का प्रयास कर रहे हैं। शिक्षक स्कूल जाने के बाद नेताओं के घर और दफ्तर में दस्तक दे रहे हैं। इसके लिए स्कूल प्रभारियों से भी जुगाड़ फिट कर लिया है। स्कूल प्रभारी शिक्षकों को रिलीव करने में आनाकानी कर रहे हैं।
जिले के दूरदराज क्षेत्रों में दर्जनों स्कूल ऐसे हैं, जहां शिक्षकों की कमी है। कमी दूर करने के लिए सरकार ने उन स्कूलों से शिक्षकों का तबादला किया है, जहां शिक्षकों की संख्या पर्याप्त है, लेकिन शिक्षा खंड मैहला में कई ऐसे शिक्षक हैं, जो तबादले के आदेश को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। वे दूसरे स्कूल में ज्वाइन करने के बजाय अपनी गृह पंचायत के स्कूल में ही नौकरी करने का जुगाड़ लगा रहे हैं।
मुख्यमंत्री के आदेशों के बाद शिक्षकों के तबादले को लेकर शिक्षा उपनिदेशक ने भी आदेश जारी कर दिए हैं। बावजूद इसके अभी तक शिक्षक को स्कूल प्रभारी रिलीव नहीं कर रहे हैं।
प्रारंभिक शिक्षा विभाग के उपनिदेशक सुमन मिन्हास ने बताया कि जेबीटी शिक्षकों के तबादला आदेश जारी किए गए हैं। संबंधित अध्यापक ने पारिवारिक कारणों का सरकार और विभागीय उच्चाधिकारियों को तर्क दिया है। इस वजह से उन्हें रिलीव नहीं किया जा सका है। कहा कि जल्द ही अध्यापक स्कूल से रिलीव किया जाएगा।