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Chamba News: माता भरमाणी के दर्शन किए बिना पूरी नहीं होती मणिमहेश यात्रा

Thu, 07 Sep 2023 11:04 PM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्बा
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संवाद न्यूज एजेंसी
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भरमौर (चंबा)। समुद्र तल से 9000 फीट की ऊंचाई पर डुगासार में बसी माता भरमाणी के दर्शन के बिना श्रद्धालुओं की मणिमहेश यात्रा पूरी नहीं होती है। मान्यता है कि इसके लिए स्वयं भगवान शंकर ने माता भरमाणी को वरदान दिया था कि यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को सबसे पहले भरमाणी माता के दर्शन करने होंगे।
वहां स्थापित ब्रह्मकुंड में स्नान कर मणिमहेश की यात्रा पूर्ण होगी। इसलिए श्रद्धालु मणिमहेश जाने से पूर्व भरमाणी माता के मंदिर में दर्शन करते हैं। यही कारण है कि जम्मू-कश्मीर से आने वाले श्रद्धालुओं के जत्थे अपना पहला पड़ाव भरमौर में डालते हैं, जिससे भरमाणी माता के दर्शन कर वे आगे की यात्रा पर निकल सकें। ऐसा माना जाता है कि यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु सच्ची आस्था के साथ माता भरमाणी से जो भी मांगते हैं, माता भक्तों की मनोकामना अवश्य पूरी करती हैं। यह भी मान्यता है कि भरमाणी माता के दर्शन और ब्रह्म कुंड में स्नान करने के उपरांत मणिमहेश की चढ़ाई भी श्रद्धालुओं को परेशान नहीं करती।
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मान्यता है कि पहले भरमौर का प्राचीन नाम ब्रह्मपुर था। यह नाम माता भरमाणी के नाम से पड़ा। जनश्रुति है कि पहले चौरासी परिसर पर माता भरमाणी का मंदिर था। यहां पुरुषों के लिए शाम के वक्त रुकना मना था।
चौरासी सिद्ध एक प्रमुख नाथ मणिमहेश की तरफ जा रहे थे तो उन्हें चौरासी पर रात को ठहरने के लिए उपयुक्त स्थान मिला। उन्होंने वहां अपनी धूनी रमा दी। अंधेरा होने लगा तो सिद्ध भक्ति में लीन हो गए। मां ने देखा कि रात का समय हो गया तो सिद्ध क्यों नहीं जा रहे हैं। क्रोध में मां ने सभी चौरासी सिद्धों की तरफ देखा तो इनमें एक प्रमुख सिद्ध जो भगवान शंकर का रूप थे। मां उनके पास गईं और क्षमा याचना करनी लगीं। उन्होंने भगवान शंकर से कहा कि चौरासी परिसर पर पुरुष जाति के रुकना निषेध था, अब मैं यहां नहीं रूकूंगी। तब मां भरमाणी भरमौर से ढाई किलोमीटर दूर डुगासार नामक स्थान पर चली गईं। यहां से चौरासी परिसर नहीं दिखता है। भरमाणी माता ने शिव शंकर से वरदान मांगा कि पहले मेरा स्थान चौरासी था, अब मैं डुगासार चली गई हूं। ऐसे में मेरे स्थान पर कोई भक्त नहीं आएगा। भगवान शंकर ने भरमाणी माता को वरदान दिया कि मेरी यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाएगी, जब तक श्रद्धालु भरमाणी मां के दर्शन नहीं करेंगे।
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भरमाणी माता जाने के लिए दो रास्ते हैं एक रास्ता पैदल ढाई किलोमीटर है, जो बाडी मलकौता गांव से होता हुआ पहुंचता है। दूसरा रास्ता जीप योग्य मार्ग है, जिसकी लंबाई छह किलोमीटर है।

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