रावी नदी को दूषित करने पर जल शक्ति विभाग को 15 लाख जुर्माना
सीवरेज प्लांट से छोड़े जाने वाले पानी का बार-बार फेल हो रहा था सैंपल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचेत करने पर भी विभाग ने नहीं किया कोई सुधार
पीसीबी सदस्य सचिव ने रिपोर्ट के आधार पर विभाग को लगाया यह जुर्माना
प्रवीण कुमार
चंबा। रावी नदी को प्रदूषित करने पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जल शक्ति विभाग को 15 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। बारगाह के पास संचालित सीवरेज प्लांट से छोड़े जा रहे पानी से रावी का पानी दूषित हो रहा था। जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने सीवरेज प्लांट से छोड़े जाने वाले पानी की जांच की तो पानी मानकों पर खरा नहीं उतरा। इस पानी के सैंपल को बोर्ड की लैब में फेल करार दिया गया। इसके लिए बोर्ड ने जल शक्ति विभाग को सूचित किया और सीवरेज प्लांट से छोड़े जाने वाले पानी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की पूरी क्रिया अपनाकर छोड़ने के निर्देश दिए, लेकिन विभाग ने गंभीरता नहीं दिखाई। ऐसे में जब बोर्ड ने चार से पांच बार सीवरेज प्लांट से छोड़े जाने वाले पानी का सैंपल जांच के लिए लिया तो मानकों पर खरा नहीं उतरा। हर बार पानी के सैंपल फेल हो गए। दूषित पानी के रावी नदी में मिलने से स्वच्छ पानी भी दूषित हो रहा था। इसको लेकर बोर्ड ने रिपोर्ट बनाकर पीसीबी सदस्य सचिव शिमला को भेजी। यहां रिपोर्ट के आधार पर जल शक्ति विभाग को जुर्माने की धनराशि तय हुई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जल शक्ति विभाग के अधिकारी को लिखित तौर पर अवगत करवा दिया है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के सिद्धांत में प्रदूषकों और दूषित पदार्थों को हटाने के लिए भौतिक, जैविक और रासायनिक प्रक्रियाओं की एक शृंखला के माध्यम से अपशिष्ट जल का उपचार शामिल है। इस प्रक्रिया से जब सीवरेज प्लांट से पानी छोड़ा जाता है तो वह पानी दूषित नहीं होना चाहिए। चंबा में संचालित सीवरेज प्लांट से दूषित पानी नदी में छोड़ा जा रहा था। इससे नदी का पानी दूषित होने का खतरा बढ़ गया था।
उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहायक अभियंता राहुल शर्मा ने बताया कि बारगाह के सीवरेज प्लांट से निकलने वाले पानी के पांच सैंपल फेल हुए थे। इससे रावी दूषित हो रही थी। इसकी रिपोर्ट पीसीबी सदस्य सचिव को भेजी थी। वहां से जल शक्ति विभाग को 15 लाख का जुर्माना किया गया है।