चंबा। भद्रवाह के डोडा जिले से मणिमहेश यात्रा करने पहुंचे जत्थे डलझील पर छड़ियों को रखने के लिए जगह नहीं मिलने पर प्रशासन के इंतजामों पर सवाल उठा रहे हैं। हर साल भद्रवाह और डोडा से हजारों श्रद्धालु छड़ी के साथ पैदल यात्रा कर डलझील पहुंचते हैं।
यहां उनकी छड़ी स्थापित होती है। यह परंपरा सदियों से चल रही है। तबसे लेकर आज तक उन्हें कभी भी अपनी छड़ियां स्थापित करने को जगह के लिए परेशान नहीं होना पड़ा। इस बार डलझील में छड़ियों को स्थापित करने के लिए भी उपयुक्त स्थान नहीं मिल रहा है। इसको लेकर भद्रवाह से आने वाले श्रद्धालु काफी नाराज और निराश हैं।
चंबा चौगान में प्रशासन ने श्रद्धालुओं के रहने के लिए अच्छे इंतजाम किए हैं। डलझील में जिस प्रकार से छड़ी यात्रा को बैठने के लिए उचित स्थान नहीं मिल रहा है, उसके वीडियो देखकर श्रद्धालु काफी नाखुश हैं। छड़ियों को उपयुक्त स्थान उपलब्ध करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि इसमें कोई कमी है तो प्रशासन इसका जिम्मेदार है। - पवन ठाकुर, भद्रवाह
पिछले साल डलझील से लेकर मणिमहेश तक लाइट की उचित व्यवस्था नहीं थी। इस वजह से श्रद्धालुओं को पैदल आवाजाही करने में काफी परेशानी हुई। इस बार प्रशासन को पैदल यात्रियों के लिए उचित व्यवस्था करवानी चाहिए। डलझील में टेंट के दाम काफी महंगे रहते हैं। इसमें भी प्रशासन को हस्तक्षेप करना चाहिए। - दर्शन कुमार, भद्रवाह
हड़सर से लेकर डलझील तक विभिन्न पड़ावों पर रहने के लिए टेंट की अस्थायी व्यवस्था रहती है। टेंट में श्रद्धालुओं ने मनमाने दाम वसूले जाते हैं। इसकी जांच करने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने चाहिए, क्योंकि बारिश के दौरान श्रद्धालुओं को खुले आसमान के नीचे भी रात बितानी पड़ती है। - विश्वनाथ, भद्रवाह
यातायात से लेकर डलझील से लेकर मणिमहेश तक पैदल रास्ते में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उचित प्रबंध होने चाहिए। सड़क पर जाम न लगे, इसके लिए पहले से व्यवस्था करके रखनी चाहिए। घोड़े और पैदल चलने वाले यात्रियों के लिए अलग-अलग रास्ते की व्यवस्था होनी चाहिए। - राकेश कुमार, डोडा