चंबा। चंबा नगरी के ईष्टदेव लक्ष्मीनारायण मंदिर की आय में वर्षों से कोई बढ़ोतरी नहीं हो पाई है। इस कारण ऐतिहासिक मंदिर में व्यवस्थाओं को और बेहतर करने में श्री लक्ष्मीनारायण ट्रस्ट को भी दिक्कत हो रही है। हैरानी की बात है कि वर्षों पुराने निर्धारित किए गए किराये के रूप में कुछ ही दुकानदार महज 100 से लेकर 150 रुपये प्रति माह किराये के रूप में अदा कर रहे हैं। इतना ही नहीं, लक्ष्मीनारायण ट्रस्ट के तहत आने वाली छतराड़ी, मैहला और साहो की दुकानों का अभी मूल्यांकन तक नहीं हो पाया है। हालांकि, राजस्व विभाग की ओर से दुकानों की असेसमेंट (मूल्यांकन) करने के लिए लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा गया है। इसके बाद ही अब नए सिरे से दुकानों के असेसमेंट के आधार पर नया किराया लागू किया जा सकता है। असेसमेंट में होने वाली देरी भी मंदिर की आय में बाधा बनी हुई है।
जानकारी के मुताबिक श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर ट्रस्ट के तहत कुल 54 दुकानें आती हैं। इसमें चंबा शहर और आसपास स्थित 45 दुकानें हैं। इनमें कसाकड़ा में 9, सुल्तानपुर में 6, डोगरा बाजार में 3, जनसाली बाजार में 4, लक्ष्मीनारायण मंदिर के परिसर के बाहर 14 और डोगरा बाजार स्थित न्यू कॉम्पलेक्स में 7 दुकानें स्थित हैं। इन दुकानों की एवज में प्रति माह 100 से लेकर 150 रुपये किराया ट्रस्ट के खाते में आता है। हैरानी की बात है कि वर्ष 2016 में दुकानों की असेसमेंट करवाई गई है। इसके तहत अभी तक दुकानदारों की ओर से असेसमेंट के आधार पर निर्धारित किए गए किराये की अदायगी नहीं की जा रही है। ऐसे में श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर ट्रस्ट की आय न बढ़ना स्वाभाविक है। इतना ही नहीं, ट्रस्ट के अधीन आते मैहला, साहो और छतराड़ी में स्थित नौ दुकानों की नए सिरे से असेसमेंट तक नहीं हो पाई है।
श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर के लेखापाल ओम प्रकाश सहगल ने बताया कि शहर में ट्रस्ट की करीब 45 दुकानें हैं जिनका किराया वर्षों से 100 से लेकर 150 रुपये ही है। 2016 में की गई नई असेसमेंट के तहत दुकानदारों की ओर से किराये की नई दरें अभी तक चुकता नहीं की जा रही हैं।