चंबा। दिन: शु्क्रवार। स्थान: मेडिकल कॉलेज का नेत्र रोग ओपीडी का कमरा नंबर 423। समय: सुबह 11:05 बजे। आई फ्लू इंफेक्शन के मरीजों की भीड़ बढ़ रही है। ओपीडी के बाहर कतारों में स्कूली बच्चे, महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग कतार में खड़े होकर अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं जबकि कई युवा, बुजुर्ग और महिलाएं कतार में खड़े-खड़े थकने के बाद ओपीडी कक्ष के बाहर परिसर में बने बैंच पर बैठ कर अपनी बारी इंतजार कर रहे हैं। ओपीडी के बाहर सुरक्षा के लिए तैनात सुरक्षा कर्मी क्रमवार पर्ची के हिसाब से मरीज का नाम लेकर चिकित्सक के पास परामर्श के लिए भेज रहा है। आई फ्लू की चपेट में आए मरीजों में स्कूली बच्चों की संख्या ज्यादा है। इसके अलावा बिना चिकित्सीय परामर्श के आंखों में दवाई डालने के बाद बिगड़ती तबीयत के बाद भी लोग उपचार के लिए चिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं। सिविल अस्पताल डलहौजी, चुवाड़ी, भरमौर और तीसा में भी रोजाना 10 से 50 मरीज आईफ्लू की शिकायत लेकर चिकित्सीय परामर्श और उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सक भी मरीजों को आईफ्लू से बचाव के लिए किसी से भी हाथ न मिलाने, किसी का रुमाल या अन्य सामान उपयोग न करने, भीड़भाड़ के इलाके में न जाने का परामर्श दे रहे हैं।
नेत्ररोग ओपीडी में रोजना 250-260 मरीज अपनी आंखें की जांच करवाने और रुटीन चेकअप के लिए पहुंच रहे हैं।
क्या है लक्षण
आंखें में लाली आना, खुजली होना, कान के साथ गांठ बनना, पलकों में सूजन आना, आंखों में बेतहाशा दर्द होना, आंखों में रेत-मिटटी के कण होने का आभास होना आदि इसके लक्षण हैं।
आई फ्लू होने पर सर्वप्रथम काला चश्मा पहनना, संक्रमित मरीज का सामान, तौलिया आदि इस्तेमाल न करना, नेत्र रोग विशेषज्ञ के परामर्श के बिना किसी भी दवा को आंखों में नहीं डालना चाहिए।
दो दिन से बेटे की आंखों में जलन और भारीपन की शिकायत है। दवाई की दुकान से आंखों में डालने की ड्राॅप्स लेकर भी डाल कर देख लिया लेकिन, दर्द कम होने का नाम नहीं ले रही है। -राजेंद्र शर्मा, कियाणी निवासी।
आई फ्लू की सबसे पहले घर में बेटी को शिकायत हुई। इसके बाद अब परिवार के अन्य सदस्यों को भी यह समस्या हो रही है। समय रहते बेटी को चिकित्सक के पास लेकर उपचार के लिए पहुंचा हूं। -राहुल धीमान, सरू निवासी।
आंख में जलन और भारीपन के बाद अब आंखों की पलकों में गाद बन रही है। इससे हर समय आंख में जलन रहती है। बार-बार आंखों को धोने के बाद भी समस्या दूर नहीं हो पाई है। -महेशी देवी, पांगी निवासी।
स्कूल से घर लौटने के बाद बेटे ने आंख में दर्द होने की बात कही। हालांकि, पानी से आंखें साफ भी करवाईं लेकिन, सुबह अधिक दर्द होने पर चिकित्सीय परामर्श से दवाई देने के लिए पहुंची हूं। -सुषमा देवी, देवीदेहरा निवासी।
काला चश्मा पहनें मरीज
नेत्ररोग विशेषज्ञ शैलेंद्र मिंहास ने बताया कि आंखें शरीर का सबसे नाजुक हिस्सा है। बच्चों में सबसे अधिक आई फ्लू के लक्षण पाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, बिना परामर्श के आंखों में ड्राॅप्स डालने के बाद बिगड़ती तबीयत के बाद मरीज उनके पास पहुंच रहे हैं। आई फ्लू से पीड़ित बच्चों को काला चश्मा लगाकर रखना चाहिए जिससे बार-बार वे आंख को हाथ न लगा पाएं। साथ ही किसी अन्य का सामान भी उपयोग नहीं करना चाहिए।