चंबा। जिले के कई स्कूलों में दसवीं कक्षा का परिणाम निराश करने वाला रहा है। इसका कारण स्कूलों में शिक्षकों की कमी को माना जा रहा है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में स्टाफ की कमी के कारण विद्यार्थी अच्छे अंक नहीं ला पाए हैं।
उन्होंने कहा कि 12वीं कक्षा का परिणाम भी अच्छा नहीं रहा है। जिला चंबा के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रंडोह में भी दसवीं कक्षा के 42 में से 19 विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट आई है। स्कूल के पांच विद्यार्थी फेल हो गए हैं। 18 विद्यार्थी पास हुए हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल में साल भर शिक्षकों की तैनाती नहीं की गई। जब कुछ स्टाफ की तैनाती की गई, तब तक स्कूल में विद्यार्थियों की परीक्षाएं शुरू हो चुकी थीं। इस कारण विद्यार्थी अच्छी तरह से पढ़ाई नहीं कर पाए।
गौर रहे कि रंडोह स्कूल में अध्यापकों के 18 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में हिंदी, पीटीआई, कला शिक्षक के पद खाली हैं। इस कारण इस वर्ष दसवीं का 43 और 12वीं का परिणाम 64 प्रतिशत रहा है। पिछले वर्ष 90 प्रतिशत से 100 प्रतिशत परिणाम रहा था। पिछले साल से टीजीटी नॉन मेडिकल, टीजीटी आर्ट्स के पद रिक्त थे। साल के अंत में जब बच्चों की परीक्षाएं शुरू हुईं तो इन पदों में स्टाफ की तैनाती हुई है। ऐसे में शायद यहीं वजह है कि इस बार स्कूल का परिणाम शत-प्रतिशत नहीं आया है।
अभिभावकों में नीलम कुमारी, रेशमा, महेश, सुरेंद्र, प्रदीप कुमार और सरोजनी ने कहा कि स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, स्कूलों की स्थिति में बदलाव के लिए सरकार बातें तो करती है, लेकिन धरातल पर स्कूलों की दशा काफी खराब है। कहा कि साल भर रंडोह स्कूल अध्यापकों की तैनाती नहीं की गई। जब परीक्षा का समय आया तो स्टाफ भेज दिया गया। रंडोह स्कूल में वर्तमान समय में 274 शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। अभी भी पूरे स्टाफ की तैनाती नहीं हुई है।
विद्यालय प्रधानाचार्य मनोज कुमार का कहना है कि स्टाफ की कमी के कारण इस वर्ष दसवीं और 12वीं का परिणाम बेहतर नहीं रहा है। उधर, उच्च शिक्षा उपनिदेशक प्यार सिंह चाढ़क ने कहा कि वे हर माह उच्चाधिकारी को स्कूलों में स्टाफ की कमी के बारे में रिपोर्ट के माध्यम से अवगत करवाते हैं। जैसे स्वीकृति मिलती है, अध्यापकों की तैनाती करवा दी जाती है।