चंबा। टिपर की चपेट में आने से जान गंवाने वाले गजेंद्र के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। किसी को भरोसा नहीं हो रहा है कि रोजमर्रा की तरह दिहाड़ी लगाने के लिए निकले गजेंद्र अब कभी लौटकर नहीं आएंगे।
घर पर उनकी पत्नी रामदेई और दो बेटियां नीतू और रेखा का रो-रोकर बुरा हाल है। गजेंद्र दिहाड़ी-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे।हादसे ने परिवार से कमाने वाला छीन लिया है। अब रामदेई पर ही परिवार के पालन-पोषण का बोझ आ गया है।
बन्नू निवासी गजेंद्र हंसमुख स्वभाव के व्यक्ति थे। कुछ साल पहले गिरने के कारण उनकी टांग में चोट लग गई थी। चिकित्सक ने चलने के लिए लाठी का सहारा ही वाजिब बताया। परिवार का भरण-पोषण करने के लिए वह मेहनत-मजदूरी करने के साथ टोकरियां बनाकर बेचते थे। बड़ी बेटी नीतू की शादी हो चुकी है। रेखा जमा दो कक्षा में पढ़ाई कर रही हैं। परिवार का खर्च और बेटी की पढ़ाई के लिए गजेंद्र मेहनत-मजदूरी करते थे। बुधवार सुबह भी दिहाड़ी लगाने के लिए घर से हंसी-खुशी निकले थे, लेकिन घर से करीब आधा किलोमीटर दूर टिपर की चपेट में आ गए।