चंबा। आकांक्षी जिला चंबा में संचालित मेडिकल कॉलेज सहित अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में लैब तकनीशियन के 97 पद खाली हैं।
इस वजह से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों के टेस्ट नहीं हो रहे हैं। मरीजों को मजबूरी में निजी लैब में पैसे देकर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। मरीजों के टेस्ट करने के लिए सरकार ने लाखों रुपये की लागत से स्वास्थ्य संस्थानों में लैब तो बनाई हैं, लेकिन इनमें लैब तकनीशियन नहीं हैं। मेडिकल कॉलेज सहित जिले के 44 स्वास्थ्य संस्थानों में लैब तकनीशियन के 112 पद स्वीकृत हैं। मौजूदा समय में सरकार ने 15 पदों पर ही लैब तकनीशियन की नियुक्ति की है। 97 पद खाली हैं। इसका असर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है। स्वास्थ्य संस्थान में मरीज का टेस्ट नहीं होने से मरीज को निजी लैब का रुख करना पड़ता है। वहां मुफ्त होने वाले टेस्ट के लिए पैसे चुकाने पड़ते हैं।
आयुष्मान और हिमकेयर योजना में सरकार मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा दे रही है। स्वास्थ्य संस्थानों में टेस्ट न होने से मरीज को इस योजना से जुड़े होने के बावजूद निजी लैब में पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। नागरिक अस्पताल डलहौजी, तीसा, चुवाड़ी और किहार में मरीजों के टेस्ट करने के लिए एक भी लैब तकनीशियन नहीं है। यहां मरीजों का टेस्ट करने के लिए प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं। इसके अलावा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी मरीजों का टेस्ट करने के लिए लैब तकनीशियन की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को पेश आने वाली इस समस्या को लेकर आज तक किस भी नेता ने सरकार के समक्ष यह मुद्दा नहीं उठाया है। यही कारण है कि आकांक्षी जिले में स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ नहीं हो पा रही हैं। राजनीतिक पार्टी के नेता सिर्फ अपने लाभ तक सीमित हो रहे हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर कपिल शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त लैब तकनीशियनों के पदों के बारे में सरकार को अवगत करवाया जा चुका है। सरकार जल्द ही इन पदों पर तैनाती कर सकती है।