चंबा। जिला चंबा के बागवान इस बार अपनी सेब की फसल को लेकर काफी निराश दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि उन्हें जितनी उम्मीद थी, उतनी पैदावार नहीं हो पाई है। बागवानों की मानें तो इस साल सेब बेचना तो दूर खाने के लिए भी नहीं निकला है।
जिला चंबा के पल्यूर क्षेत्र की बात करें तो इस बार बीस प्रतिशत की सेब की फसल मंडी तक पहुंच पाई है। बागवानों ने सेब की फसल कम होने की वजह मौसम की मार बताई है। इतना ही नहीं, उनका दवाइयां स्प्रे करने का खर्च भी पूरा नहीं हो पाया है। इस कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार बेहद कम कमाई बागवानों की हुई है। कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि सेब की फसल कम हुई है, क्योंकि उन्हें इस साल मौसम का साथ भी नहीं मिल पाया है। पहले ओलावृष्टि से फूल झड़ गए थे। बारिश और धूप भी जरूरत के अनुसार नहीं हो पाई। इससे बागवानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं।
इस बार सेब की फसल कम हुई है। दवाइयों की स्प्रे का भी खर्च पूरा नहीं निकल पाया है। ओलावृ़ष्टि से ही फूल झड़ गए और जब धूप की जरूरत पड़ी तो उस वक्त धूप नहीं खिली। इससे आमदनी भी कम हो पाई है। - कमल कुमार
सेब बेचना तो दूर इस बार खाने के लिए भी नहीं है। अस्सी प्रतिशत सेब की फसल इस बार नहीं हो पाई है। जो फसल हुई थी, कुछ अदद तक वही मंडी तक पहुंचाई है। इससे आमदनी भी बेहद कम हुई है। - कुलदीप कुमार
हर साल सेब की इतनी फसल होती थी कि सितंबर तक मंडियों तक सप्लाई पहुंचती थी, लेकिन इस बार सेब की फसल इतनी कम हुई कि कम दिनों में ही सेब की फसल खत्म हो गई है। ऐसे तो दो माह तक मंडियों तक सेब पहुंचता था। - भिंद्र सिंह
उधर, उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह का कहना है कि इस बार सेब की फसल कई क्षेत्रों में कम है। मौसम के चलते फसल कम हुई है।