भरमौर में लकड़ी के घरों की सुरक्षा करेंगे फायर हाईड्रेंट
आपदा प्रबंधन ने स्वीकृत किया 23.14 करोड़ का प्रोजेक्ट, विधायक डॉ. जनकराज ने उठाई थी मांग
जनजातीय क्षेत्र में सड़क सुविधा न होने वाले गांवों को जोड़ा जाएगा फायर हाईड्रेंट प्रणाली से
भंडारण कर बारिश के पानी को भी किया जाएगा आग बुझाने में इस्तेमाल
रंजीत शर्मा
भरमौर (चंबा)। जनजातीय क्षेत्र भरमौर में लकड़ी से बने घरों की आग से सुरक्षा अब फायर हाईड्रेंट करेंगे। इसके लिए आपदा प्रबंधन की ओर से 23.14 करोड़ का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत भरमौर में उन सभी गांवों को हाईड्रेंट प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जो अभी सड़क से नहीं जुड़े हैं। जनजातीय क्षेत्र में घर देवदार की लकड़ी से बने हैं। यहां टीडी के तहत वन विभाग से इमारती लकड़ी लेकर लोग घरों का निर्माण करते हैं। ऐसे में अधिकतर घर देवदार की लकड़ी से बने होते हैं। लकड़ी से बने घर आग की चिंगारी की चपेट में आने से तेजी से आग पकड़ लेते हैं। यही कारण है कि जनजातीय क्षेत्र में आग की घटना होने पर बचाव कार्य करना मुश्किल हो जाता है। फायर विभाग की गाड़ी गांव तक नहीं पहुंच पाती। इसके चलते जो मकान आग की चपेट में आता है, वह चंद लम्हों में जलकर स्वाह हो जाता है। इसी समस्या का समाधान करने के लिए स्थानीय विधायक ने फायर हाईड्रेंट प्रणाली को ऐसे गांव में विकसित करने के लिए जल शक्ति विभाग और सरकार से मांग की थी। यह अब धरातल पर पूरी होती हुई दिखाई दे रही है।
जनजातीय क्षेत्र भरमौर के उन गांवों में अग्निकांड की घटना में अब ज्यादा चिंतित होने की जरूरत नहीं होगी। अग्निकांड की घटना होने पर हाइड्रेंट से पानी के पाइप जोड़कर तुरंत आग को बुझाने का कार्य किया जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत बारिश के पानी को भी भंडारित किया जाएगा। जल शक्ति विभाग को इस प्रोजेक्ट के लिए धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। अब आगामी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
विधायक डॉक्टर जनकराज ने बताया कि उन्हें भरमौर के गांव तक हाईड्रेंट प्रणाली स्थापित करने के लिए जल शक्ति विभाग के अधिकारियों समेत सरकार से मांग की थी। उनकी यह मांग पूरी हो चुकी है। अब भरमौर के लोगों को आगजनी की घटना होने पर तुरंत बचाव कार्य की सुविधा मिल पाएगी।