ऊना। जब मन परमात्मा से जुड़ जाता है। तब हृदय आनंद से पुलकित हो उठता है।
शाश्वत, सत्य एवं सनातन ब्रह्म का चिंतन करने से ही अलौकिक आनंद की प्राप्ति होती है। जैसे बूंद सागर में मिलकर असीम हो जाती है ऐसे ही हमें अपने आराध्य से आकांक्षा करनी चाहिए। यह वचन श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन अतुल कृष्ण महाराज ने संत भूरीवाले आश्रम कुठेड़ा खैरला में व्यक्त किए। कहा कि मुट्ठी में आसमान को बांधना है। तो कठिन पर मुश्किल बिल्कुल भी नहीं, यही सिद्धांत ईश्वर के संबंध में भी लागू होता है। इस मौके पर दर्जनों श्रोता मौजूद रहे। संवाद