चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज का आपातकालीन कक्ष इंटर्न के भरोसे चलाया जा रहा है। छुट्टी वाले दिन आपातकालीन कक्ष में कोई भी विशेषज्ञ या मेडिकल अफसर नहीं होता।
आपात स्थिति में मरीजों के प्राथमिक इलाज का जिम्मा इंटर्न के कंधों पर छोड़ा गया है। आपातकालीन कक्ष में किसी भी समय इमरजेंसी पड़ सकती है। ऐसी परिस्थिति में इंटर्न को फोन कर विशेषज्ञ से राय लेनी पड़ती है। फोन करने में ही कई बार पांच से दस मिनट लग जाते हैं। इसलिए प्रबंधन को मरीजों की जिंदगी को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन कक्ष में हर समय एक विशेषज्ञ या मेडिकल अफसर की तैनाती रखनी चाहिए। छुट्टी वाले दिन ओपीडी बंद होने से सभी मरीज आपातकालीन कक्ष में इलाज के लिए पहुंचते हैं। हालांकि, कोई बड़ी घटना हो जाए तो आपातकालीन कक्ष में प्रबंधन घर से विशेषज्ञों को बुला लेता है। रूटीन में आने वाले मरीजों को आपातकालीन कक्ष में विशेषज्ञ की सेवा का लाभ नहीं मिल पाता।
तीमारदारों में हंसराज, जय सिंह, किशोर कुमार, विनोद कुमार, दीपक शर्मा, बावा खन्ना और सुरेश ठाकुर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन कक्ष में हर समय एक विशेषज्ञ या मेडिकल अफसर तैनात रहना चाहिए। कार्यवाहक चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि आपातकालीन कक्ष में किसी भी समय मरीज के इलाज के लिए विशेषज्ञ को फोन कर बुलाया जा सकता है। विशेषज्ञों की कमी के चलते कक्ष में विशेषज्ञ की ड्यूटी नहीं लगाई जा रही है।