चंबा। हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड कर्मचारी, इंजीनियर और पेंशनर यूनियन के पदाधिकारियों ने मंडल कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के दौरान यूनियन के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे। पदाधिकारियों ने वित्तीय बदहाली के लिए प्रबंधन वर्ग को दोषी ठहराया। सरकार से मांग की है कि बिजली बोर्ड में तुरंत स्थायी प्रबंध निदेशक की तैनाती की जाए। कहा गया कि छह जनवरी तक मांगें पूरी नहीं की गईं तो राज्य व्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। जिला ऊना से आंदोलन की शुरुआत की जाएगी।
राज्य के मुख्य सचिव मुकेश कुमार जट़्ट और पूर्व सलाहकार अनिल वर्मा ने बताया कि बिजली बोर्ड पिछले 9 माह से अस्थायी प्रबंध निदेशक के सहारे चलाया जा रहा है। इससे बोर्ड की कार्यप्रणाली प्रभावित हुई है। इसका असर रहा कि बोर्ड के कर्मचारियों और पेंशनरों का वेतन और पेंशन एक जनवरी को नहीं मिल पाई। आज बिजली बोर्ड से 50 हजार परिवार जुड़े हैं। वर्तमान के प्रबंध निदेशक की कार्यप्रणाली का खमियाजा इनके परिवार को भुगतना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि बोर्ड के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। उनके पास पहले ही दो विभागों का भार है। कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने सरकार से बिजली बोर्ड में स्थायी प्रबंध निदेशक लगाने की मांग की। पदाधिकारियों ने बोर्ड में पुरानी पेंशन की बहाली में देरी पर चिंता जताई और इसे शीघ्र लागू करने का आग्रह किया। सीसीएस पेंशन नियम, 1972 राज्य सरकार की तर्ज पर लागू किए गए हैं और इन नियमों में सरकार की ओर से किए गए सभी संशोधन बोर्ड में लागू किए गए हैं। कानूनी तौर पर पुरानी पेंशन के बारे में किया गया सरकार का यह संशोधन भी बोर्ड में लागू करना अनिवार्य है। इसे देरी से लागू करने में तकनीकी दिक्कतें बढ़ेंगी। सरकार से बोर्ड को निर्माण के लिए चंबा जिला में दी गई छोटी पनविद्युत परियोजनाओं के निर्माण संबंधित बंद किए गए कार्यालयों को भी शीघ्र शुरू करने की मांग की गई। यूनियन के प्रधान अशोक कुमार, प्रताप चौहान तेजू राम, मुकेश बेदी, आत्मा राणा, दलीप चौणा, विनीत ठाकुर, अंकूर, सुमन कुमार और अरुण कुमार सहित अन्य पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।