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बकलोह में गोरखा समुदाय का दिवाली पर्व शुरू

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चुवाड़ी (चंबा)। हिंदू धर्म में आस्था रखने वाले बकलोह के गोरखा समुदाय के लोगों का पांच दिवसीय दीपावली का त्योहार दो दिन पहले ही शुरू हो गया है। दीपावली की रात को लक्ष्मी पूजा करने के बाद गोरखा समुदाय की महिलाएं एवं युवतियां भइलो खेलने के लिए एक-दूसरे के घरों में जाती हैं।
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यह परंपरा गोरखा समुदाय में एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में देखा जाती है। लक्ष्मी पूजा के दिन गोरखा समुदाय के लोग गाय का पूजन करते हैं और गाय को लक्ष्मी का स्वरूप मानकर घर के आंगन को गोबर से पोतने के बाद दीये जलाते हैं। लक्ष्मी पूजा से दो दिन आगे ही त्योहार पर्व शुरू हो जाता है। लक्ष्मी पूजा से दो दिन आगे काग त्योहार अर्थात कौवे का पूजन, दूसरे दिन कुकुर त्योहार अर्थात यमराज के दूत कुत्ते का पूजन किया जाता है। यह अनोखी एवं पारंपरिक परंपरा का उत्सव गोरखा समुदाय में काफी उल्लास से प्रतिवर्ष मनाया जाता है। लक्ष्मी पूजा के दिन गोरखा समुदाय की युवतियां और महिलाएं घर-घर में जाकर भइलो खेलते हुए गीत के माध्यम से घर में सुख शांति का संदेश और आशीर्वाद देती हैं।
भइलो खेलने वालों को घर के मालिक यथाशक्ति दक्षिणा देते हुए उन्हें सुख और शांति का संदेश लेकर आने के लिए कहते हैं। उसी तरह लक्ष्मी पूजा के दूसरे दिन भाई टीका को लेकर तैयारी शुरू की जाती है। लक्ष्मी पूजा के एक दिन के बाद गोरखा समुदाय भाई टीका का त्योहार काफी हर्ष के साथ मनाते हैं। इस दिन लड़के देवसी खेलने के लिए निकलते हैं। देवसी गीत के जरिये घर-घर पहुंचकर स्वास्थ्य, समृद्धि, शांति और भाईचारे का संदेश देते हैं। लोगों का कहना है पहले की अपेक्षा आज के युवा इस परंपरा को भूलते जा रहे हैं। इस परंपरा को जीवित रखने के लिए जगह-जगह सामूहिक रूप से देवसी कार्यक्रम का आयोजन सामूहिक रूप से विभिन्न संस्थाओं की ओर भी किया जा रहा है।
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