प्रचार का दौर लगभग थम चुका है। चंबा जिला की 80 पंचायतों में जीत या हार का फैसला साल की पहली तारीख के साथ होने वाले मतदान के बाद आ जाएगा। जबकि आगामी पांच जनवरी तक अन्य क्षेत्रों में भी चुनावी प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। चंबा में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही राजनीतिक पार्टियों ने जिलापरिषद और बीडीसी की ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करने पर जोर लगा रखा है। इनमें से भाजपा ने सभी 18 सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर रखे हैं। साफ है इन प्रत्याशियों की जीत या हार पार्टी की जीत या हार होगी।
कांग्रेस में ऐसा नहीं है। कांग्रेस में बकान वार्ड से वनमंत्री के बेटे अमित भरमौरी ही पार्टी का चेहरा हैं। पंचायतीराज के यह चुनाव अमित भरमौरी का भविष्य भी तय करेंगे। यदि वे चुनाव जीतते हैं तो उनका अध्यक्ष बनना भी तय है। अमित इससे पूर्व भी जिलापरिषद के अध्यक्ष पद पर रहे हैं और सबसे खास बात यह है कि इस बार चंबा में जिलापरिषद का अध्यक्ष पद आरक्षित नहीं है, लेकिन चुनाव नतीजे अनुकूल नहीं हुए तो उनका राजनीतिक कैरियर भी दांव पर लग सकता है।
चंबा में जिला परिषद की कुल 18 सीटें हैं। इनमें से भरमौर की खणी व किलोड़ की दस पंचायतों और पांगी के किलाड़ वार्ड में पहले ही चुनाव हो चुके हैं। जबकि दूसरे चरण में 15 अन्य सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं। इन सीटों में कांग्रेस बकान वार्ड में वर्चस्व की लड़ाई लड़ रही है। तो भाजपा के लिए कई सीटों पर कमजोर प्रत्याशी या फिर एक से ज्यादा प्रत्याशियों में मुकाबला सिरदर्द बना हुआ है।
इनसेट
क्षेत्र का विकास ही प्राथमिकता : अमित
अमित भरमौरी का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान विकास के कार्य की रूपरेखा तय की है। वे युवा हैं और इलाके की विकास की सोच लेकर लोगों के बीच दोबारा आए हैं। उन्हें उम्मीद है कि लोग उनका साथ देंगे। इलाके का विकास उनकी प्राथमिकता रहेगा।
हमें जीत का पूरा भरोसा है : डीएस ठाकुर
भाजपा जिलाध्यक्ष डीएस ठाकुर का कहना है कि भाजपा ने सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार तय किए हैं और उन्हें जीत का पूरा भरोसा है। सभी उम्मीदवारों ने कड़ी मेहनत से प्रचार किया है। भाजपा विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है।