दुर्गम भौगोलिक स्थिति के चलते कबायली क्षेत्र का दर्जा पाने वाले भरमौर उपमंडल में इस बार पंचायतीराज चुनाव एक मुश्त होने से व्यवस्था कर पाना थोड़ा मुश्किल हो रहा है, चूंकि पंचायतीराज चुनाव 2015 से पहले भरमौर की 29 पंचायतों में दो या तीन चरणों में मतदान होते रहे हैं लेकिन इस बार एक मुश्त में चुनाव होने से चुनावी व्यवस्था करने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।
भौगोलिक दृष्टि से देखे तो भरमौर उपमंडल होली और भरमौर के बीच बंटा हुआ है। होली को भरमौर से रावी नदी की जलधारा अलग करती है, तो वहीं उपमंडल भरमौर में होली को उपतहसील का दर्जा भी प्राप्त है। यहां पर सबसे अधिक मतदाता वाली पंचायत गरोला है, तो सबसे कम मतदाता वाली पंचायत बजोल है।
चुनावी अधिसूचना जारी होने से पहले चुनाव में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले विभाग यही सोच रहे थे कि हर बार की तरह इस बार भी भरमौर में चरणों में चुनाव आयोजित होंगे लेकिन एक मुश्त चुनाव होने अधिसूचना जारी होने से विभागों को दिनरात चुनाव की तैयारी करनी पड़ रही है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि भरमौर में चुनावी कर्मियों की संख्या कम पड़ने से साथ लगते मैहला ब्लॉक से कर्मी मंगवाने पड़े ताकि चुनाव तारीख छब्बीस नवंबर से पहले चुनावी अखाड़ा तैयार कर लिया जाए।
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चुनाव की तैयारी में जुटे हैं : बीडीओ
खंड विकास अधिकारी भरमौर विवेक चौहान ने बताया कि एक मुश्त चुनाव होने की अधिसूचना प्राप्त होते ही विभाग चुनावी तैयारियों में जुट गया है। चुनाव आयोजित करने की सभी औपचारिकताओं को पूरा कर लिया गया जिसे व्यवहारिक रूप दिया जा रहा है।