परेल में वीरवार को पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर भ्रूण को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस कर्मी सुबह भ्रूण को दबाने वाली जगह पहुंचे और मनरेगा मजदूरों की शिनाख्त पर उसे बाहर निकाला गया। इसके बाद एसडीएम व डॉक्टर की निगरानी में भ्रूण की मौके पर ही जांच की गई।
जिसके बाद उसे दोबारा फिर दफना दिया गया है। भ्रूण की जांच के दौरान सामने आए सभी तथ्य को पुलिस ने रिकॉर्ड कर लिया है। इसके साथ ही मनरेगा कामगारों व पंचायत प्रधान के बयान भी दर्ज किए गए हैं। चिकित्सकीय जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि भ्रूण सात माह (प्री मिच्योर) का था और यह बालक का भ्रूण था।
डॉक्टर ने भ्रूण की शिनाख्त के लिए डीएनए के सैंपल भी ले लिए हैं। साथ ही पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर आगामी कार्रवाई शुरू कर दी है। गौरतलब है कि बुधवार को परेल में मनरेगा मजदूरों ने रावी तट पर एक भ्रूण देखा था। जिसके बाद उन्होंने इसकी सूचना पंचायत प्रधान को दी। महिलाओं ने इस भ्रूण को रावी तट पर ही दफना दिया। लेकिन मामला उजागर होने और मीडिया में आने के बाद वीरवार को पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस ने भ्रूण को निकालकर मौके पर ही उसका डॉक्टरी परीक्षण करवा लिया।
उधर, डीएसपी वीर बहादुर का कहना है कि पुलिस की टीम मौके पर भेजी गई थी। मामला काफी संवेदनशील है और इसकी गहनता से जांच-पड़ताल की जा रही है।
जरूरी साक्ष्य जुटाने के बाद दोबारा दफनाया भ्रूण : एसडीएम
उधर, एसडीएम चंबा बचन सिंह ने बताया कि भ्रूण मिलने के बाद पुलिस की सूचना पर वे मौके पर गए थे। वहां डॉक्टरों की टीम मौजूद थी जिसने भ्रूण की जांच-पड़ताल की है। उन्होंने बताया कि सभी जरूरी साक्ष्य जुटाए गए हैं और उसके बाद भ्रूण को दोबारा दफना दिया गया है।