बर्फबारी प्रभावित इलाकों में आगामी पांच माह के लिए खाद्य वस्तुओं की सप्लाई का काम शुरू हो गया है। चंबा में जनजातीय क्षेत्र भरमौर में अब तक करीब 66 प्रतिशत सप्लाई भेजी जा चुकी है। इसमें सर्वाधिक सप्लाई आटे की हुई है। ऐसे में आगामी पहली जनवरी से एपीएल परिवारों पर लगने वाले कट का कोई असर जनजातीय क्षेत्रों के लोगों पर नहीं पड़ेगा।
भरमौर के लिए सिविल सप्लाई कार्पोरेशन 84 प्रतिशत आटे की सप्लाई कर चुका है। नवंबर से मार्च तक की सप्लाई भेजी जा रही है। इसमें 15 हजार 900 क्विंटल आटा सप्लाई होना है। अब तक सिविल सप्लाई कार्पोरेशन 13 हजार 300 क्विंटल आटे की सप्लाई इन इलाकों के लिए जारी कर चुका है। जबकि गेहूं के लिए निर्धारित 13 हजार 300 क्विंटल कोटे के मुकाबले में अब तक आठ हजार क्विंटल की सप्लाई की जा चुकी है। जो करीब कुल सप्लाई का 61 प्रतिशत है। इस बार भरमौर के लिए पांच माह तक चावल का 22 हजार क्विंटल कोटा निर्धारित किया गया था। 15 हजार 400 क्विंटल चावल की सप्लाई की जा चुकी है। जबकि, चीनी चार हजार 870 क्विंटल सप्लाई होनी थी। इसमें से तीन हजार 240 क्विंटल की सप्लाई की जा चुकी है। खाद्य तेल में कार्पोरेशन ने दो लाख 72 हजार लीटर के मुकाबले अब तक एक लाख 37 हजार लीटर की सप्लाई पहुंचा दी है। फिलहाल, बर्फबारी प्रभावित इलाकों में सप्लाई नियमित रूप से जारी है और इस सप्लाई पर किसी भी बंदिश का असर नहीं पड़ेगा।
विभागीय अधिकारी मानते हैं कि जनजातीय इलाकों के लिए राशन के कोटे को एडवांस भेजने का नियम पहले से बना है। ताकि बर्फबारी होने पर इन इलाकों में भुखमरी जैसी नौबत न आए।
उधर, सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक त्रिलोच चंद का कहना है कि आटे पर पाबंदी की खबरों का कोई असर जनजातीय या बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों पर नहीं पड़ेगा। इन जगहों में राशन की एडवांस सप्लाई भेजी जाती है और यह कोटा पहले से निर्धारित था।
वहीं, खाद्य आपूर्ति नियंत्रक मोहन सिंह का कहना है कि जनजातीय क्षेत्र में राशन की सप्लाई कार्पोरेशन करता है। उनका विभाग सिर्फ इस सप्लाई पर निगरानी रखता है। विभाग ने कार्पोरेशन से सप्लाई संबंधी रिपोर्ट मांगी है।