अमर उजाला ब्यूरो
चंबा। गन्ना गांव स्थित गढ़ नाले में शव जलाने वालों के खिलाफ आईपीएच विभाग एफआईआर दर्ज करेगा। नाले के पास शव जलाने से शव के अवशेष और धूल-मिट्टी नाले के पानी में बहकर स्टोरेज टैंक में जमा हो रहे थे। इस पानी का इस्तेमाल दो दर्जन गांवों के लोग पीने या अन्य कार्यों के लिए करते हैं। अमर उजाला ने लोगों की समस्या को ध्यान में रखते हुए दो दिन पहले प्रमुखता से खबर को प्रकाशित किया। खबर छपने के बाद आईपीएच विभाग की टीम ने गन्ना गांव में जाकर गढ़ नाले के पास बने श्मशानका घाट का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने आसपास के गांव वासियों को हिदायत दी कि भविष्य में गढ़ नाले के पास कोई भी शव का अंतिम संस्कार नहीं करे। ऐसा करने वालों के खिलाफ विभाग एफआईआर दर्ज करवाएगा।
थलोल, वैली, खपाडू, थल्ला, ककला, करियां, फाट, बनाड़, रजेरा, तन्होला, बंजला और कुकनार सहित अन्य गांवों के लोगों ने उपरोक्त नाले में शव जलाने का विरोध किया हैं। लोगों का कहना है कि शव जलाने के बाद पीछे बचने वाले अवशेष, धूल और मिट्टी पेयजल टैंक में जमा हो जाते हैं। इस पानी को पीने से लोग बीमार हो रहे हैं। लोगों सुरेंद्र, मान सिंह, राकेश कुमार, चंद राम, हंस राज, कमल कुमार, अरविंद, चैन सिंह, देवी प्रसाद और रमन कुमार ने आईपीएच विभाग से मांग की थी कि उपरोक्त नाले में शवों का अंतिम संस्कार बंद किया जाए।
सहायक अभियंता केवल शर्मा ने बताया कि जेई और फीटर ने उपरोक्त नाले का निरीक्षण किया है। इस दौरान गांव वासियों को साफ हिदायत दी गई है कि कोई भी नाले के पास शव का अंतिम संस्कार न करे अन्यथा उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की जाएगी।
नाले के पानी से बने खाने को फेंका
खबर छपने के बाद कई ग्रामीणों ने अपने घर में उपरोक्त नाले के पानी से बने खाने को ही फेंक दिया। पानी की टंकियों को भी खाली करवा दिया। ग्रामीणों ने प्राकृतिक स्रोतों से खाना बनाने के लिए पानी लाया। अभी भी कुछेक ग्रामीण नाले का पानी का इस्तेमाल करने से परहेज कर रहे हैं।