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अदालत के फैसले पर कांग्रेसी न करें टिप्पणी : जय सिंह

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चंबा। संसद में राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने के माननीय अदालत के फैसले को लेकर कांग्रेसियों को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। मुट्ठी भर कांग्रेसियों को इस बात का इल्म होना चाहिए कि उन्हें जो सजाएं हुई हैं उन्होंने भी तो उच्च न्यायालय से स्टे लिए हुए हैं। प्रेसवार्ता में भाजपा प्रदेश सचिव एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जय सिंह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि कुछ कांग्रेसियों ने तो न्यायालय के बल ही अपनी सजाओं पर स्टे लेकर चुनाव तक लड़ा है। ऐसे में अदालत पर सवाल उठाना कांग्रेसियों को कतई शोभा नहीं देता है। उन्होंने कांग्रेसियों से सवाल किया है कि प्रदेश की भोलीभाली जनता के साथ छल करके सत्ता में आने वाली प्रदेश सरकार पहले यह बताए कि वे लोगों को दी गई दस गारंटियों को कब तक पूरा करने जा रही है। कहा कि राहुल गांधी को लेकर कांग्रेसियों ने हो हल्ला मचाया हुआ है। कांग्रेसी कह रहे हैं कि लोकतंत्र की हत्या हुई है। लोकतंत्र खतरे में है, लोकतंत्र को बचाना है। कहा कि कांग्रेसी राहुल गांधी को हीरो बनाने के चक्कर में भूल बैठे हैं कि लोकतंत्र की हत्या इंदिरा गांधी ने देश में आपातकालीन 25 जून 1975 में लगाकर की थी। असल में वह लोकतंत्र की हत्या थी। कहा कि स्वर्गीय संजय गांधी ने अपने तानाशाही रवैये से देश में जबरदस्त नसबंदी अगस्त 1976 में लगा दी थी। 62 लाख लोगों को बिना उनकी रजामंदी से उनकी नसबंदी कर दी थी जबकि सूरत की एक अदालत ने राहुल गांधी को चार वर्ष पुराने आपराधिक मानहानि मामले में दो वर्ष की सजा सुनाई और 15,000 का जुर्माना लगाया। इस आदेश को वकीलों ने दरखास्त न्यायालय में देकर सजा सस्पेंड करवाई और उन्हें 30 दिन के अंदर अपील करने का मौका दिया। यदि राहुल गांधी इस दो साल की सजा जो उन्हें हुई है अगर अपील नहीं करते और सेशन कोर्ट में स्टे नहीं लेते तो वह छह वर्षो तक चुनाव नहीं लड़ सकते थे।
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