तीसा (चंबा)। ऐतिहासिक चामुंडा माता मंदिर में आयोजित होने वाले देग्रां (बैरागढ़) जातर मेले में चुराही नाटी की धूम रही। महिलाओं और पुरुषों ने ढोल की थाप पर एक साथ नृत्य प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। महिलाओं ने जोजी और लिक्कड़ (पारंपरिक परिधान) तो वहीं पुरुषों ने साफा और डोरा पहनकर लोकनृत्य का खूब आनंद लिया। इस दौरान महिलाओं ने घुरेई गाकर चुराही नृत्य किया।
वहीं पुरुषों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर चुराही नाटी का आनंद लिया। तीन दिवसीय ऐतिहासिक बैरागढ़ जातर मेले में देवीकोठी की चामुंडा (बैरावाली) माता ने भी शिरकत की। पहली जातर के दिन माता के साजिंदों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर माता के चिह्न को देग्रां में स्थित माता के मंदिर में पहुंचाया। यहां पूजा-अर्चना के बाद तीन दिवसीय जातर मेले का आगाज हुआ।
बता दें कि वैश्विक महामारी कोरोना के दो वर्ष बाद आयोजित ऐतिहासिक जातर मेले में चुराह सहित जिले भर से लोगों और व्यापारियों ने शिरकत की। मेले में लगी अस्थायी मार्केट में लोगों ने जमकर खरीदारी करने सहित झूले झूलने का आनंद उठाया। उपमंडल स्तरीय जातर मेले के दौरान चुराह के सरकारी कार्यालयों में अवकाश रहा। मेलेे के समापन अवसर पर विधानसभा उपाध्यक्ष और चुराह के विधायक हंसराज बतौर मुख्यातिथि मौजूद रहे। उनका गृह क्षेत्र होने के कारण वह चुराही संगीत पर स्वयं को नाचने से नहीं रोक पाए। इस अवसर पर जातर मेला कमेटी के प्रधान नारायण सिंह, सचिव तेज सिंह, मुख्य सलाहकार देवी सिंह, भजन सिंह समेत प्रमोद ठाकुर, श्याम सिंह, अशोक कुमार, विजय कुमार और राजेश कुमार मौजूद रहे।