चंबा। ऐतिहासिक चंबा चौगान में चल रहे श्रीराम लीला मंचन के चौथे वन में राम और भरत मिलाप हुआ। इस दौरान चौगान में काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
इस दृश्य को देखकर सभी लोग भावुक हो गए। भरत राम की चरण पादुका लेकर अयोध्या के लिए वापस आ गए। चौथे दिन के मंचन की शुरुआत श्रीराम, सीता और लक्ष्मण की आरती से हुई। इसके बाद राम कहानी का पाठ किया गया। शाम आठ बजे श्रीराम लीला मंचन का आगाज हुआ। भगवान श्रीराम को वनवास भेजने के लिए कैकेई राजा दशरथ को विवश करती हैं। राजा दशरथ भी श्रीराम को वनवास पर भेज देते हैं। इसी बीच राजा दशरथ के इस फैसले से लक्ष्मण नाराज हो जाते हैं और राम के साथ जाने के लिए तैयार हो जाते हैं। राम लक्ष्मण को अयोध्या में ही रहने की बात कहते हैं, लेकिन लक्ष्मण नहीं माने। श्रीराम, सीता और लक्ष्मण वन के लिए रवाना होते हैं। पूरी अयोध्या नगरी के आंखों में आंसू आ जाते हैं। श्रीराम के वन जाने के बाद राजा दशरथ का भी निधन हो जाता है। इसके बाद राज्य संभालने का जिम्मा भरत को दिया जाता है। श्रीराम से मिलने के लिए भरत वन की ओर रवाना होते हैं। यह जानकारी श्रीराम लीला क्लब के प्रेस सचिव बोध राज जमदाग्नि ने दी। बताया कि पिछले काफी सालों से शहर के कारोबारी श्री राम लीला मंचन में अपना अपना किरदार निभा रहे हैं।