बिस्तर न पंखे, खस्ताहाल रेस्टरूम में खटमल भी उड़ा रहे चालकों की नींद
एक बिस्तर पर दो-दो चालक कर रहे आराम, बोले- लंबे रूट से लौटने के बाद पूरी नहीं हो रही नींद
आरोप - रेस्टरूम मांगा तो स्टोर में छह बिस्तर लगाकर सोने की कर दी व्यवस्था
कई बार भेजे प्रस्ताव, पैसा भी स्वीकृत हुआ, लेकिन रेस्टरूम नहीं बना पाया प्रबंधन
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। हिमाचल पथ परिवहन निगम के चंबा डिपो के चालक चैन की नींद नहीं ले पा रहे हैं। लंबे रूटों से लौटने के बाद रेस्टरूम की हालत देखते ही उनकी नींद उड़ जाती है। एक बिस्तर पर दो-दो चालक आराम कर रहे हैं। खस्ताहाल हो चुके रेस्टरूम में अगर आराम करने के लिए लेट भी जाते हैं तो खटमल नींद हराम कर देते हैं। चालकों का आरोप है कि रेस्टरूम में सोने की पूरी व्यवस्था नहीं है। कहा कि स्विच बोर्ड भी टूट चुके हैं। बिस्तर भी पत्थर के सहारे टिकाए गए हैं। पंखे भी नहीं हैं। इस कारण गर्मियों में उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कि इस बारे में कई बार प्रस्ताव के माध्यम से निगम और प्रदेश सरकार को अवगत करवाया गया है, लेकिन समस्या जस की तस है।
राज्य कार्यकारिणी के उपप्रधान ओम शंकर और चालक यूनियन के प्रधान हेम राज ने कहा कि पहले सोने के लिए जगह नहीं थी। परिवहन निगम से चालकों के आराम करने के लिए रेस्ट रूम की मांग की गई तो स्टोर खाली करवाकर यहां चालकों के आराम करने की व्यवस्था कर दी गई। उन्होंने कहा कि रेस्टरूम में कुल छह बिस्तर हैं। एक बिस्तर पर दो-दो चालक आराम करते हैं। इस कारण उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती है।
उनका दावा है कि रेस्ट रूम की मरम्मत के लिए पैसा भी स्वीकृत हुआ था। यह पैसा कहां गया, इसकी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि लंबे रूटों पर सैकड़ों मील का सफर करने के बाद थक-हार कर चालक आराम करने के लिए रेस्टरूम जाते हैं तो वहां की हालत देखकर ही नींद उड़ जाती है। बार-बार निगम सहित सरकार को अवगत करने के बाद भी रेस्ट की मरम्मत नहीं हो पाई है। एचआरटीसी के चंबा डिपो में वर्तमान में 240 चालकों के पद स्वीकृत हैं। 190 चालक सेवाएं दे रहे हैं। लंबे रूटों से लौटने वाले चालकों को आराम करने में परेशानियां पेश आ रही हैं। उधर, एचआरटीसी के क्षेत्रीय प्रबंधन शुगल सिंह ने कहा कि मामला ध्यान में है। उच्चाधिकारी को अवगत करवा दिया गया है। आचार संहिता हटने होने के बाद ही रेस्टरूम का कार्य होगा।