चंबा। जिले में अब प्रीफेब्रिकेटिड आंगनबाड़ी भवनों का निर्माण नहीं होगा। सरकार ने इस पर आपत्ति लगा दी है। सरकार ने यह ऑब्जेक्शन दिया है कि तेज बारिश और तूफान के दौरान यह भवन बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं। इससे काफी नुकसान हो सकता है। सरकार की इस आपत्ति के बाद भवनों का निर्माण कार्य रोक दिया है। मनरेगा के तहत यह कार्य किया जा रहा है।
जमीन के चयन के बाद समतल करने का कार्य भी शुरू हो गया था लेकिन ऑब्जेक्शन के बाद अब काम बंद कर दिया गया है। यह तय माना जा रहा है कि प्रीफेबिकेटिड भवनों का निर्माण तो नहीं होगा, लेकिन अब सरकार इस पर नई संभावनाएं तलाशेगी। जानकारी के अनुसार जिले में 1495 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें से करीब साढ़े तीन सौ से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र निजी भवनों में चल रहे हैं। अन्य आंगनबाड़ी केंद्र निजी भवनों, स्कूल बिल्डिंग, सामुदायिक केंद्रों या पंचायत भवनों में चल रहे हैं। उम्मीद की जा रही थी कि अगर प्रीफेब्रिकेटिड आंगनबाड़ी भवनों की योजना सफल रहती तो जिले के अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों को भी भवन मिलने की उम्मीद बंध जानी थी लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। सुरक्षा की दृष्टि से इस पर आपत्ति लगी है। गौरतलब है कि चंबा में पहले चारण में 60 प्रीफेब्रिकेटिड भवनों का निर्माण होना था। इन आंगनबाड़ी केंद्रों की खासियत यह थी कि कम लागत और कम समय में ही इन भवनों का निर्माण होना था। कुल मिलाकर अब आंगनबाड़ी केंद्रों को भवन के लिए इंतजार करना पड़ेगा।
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश चौधरी ने खबर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्री फेब्रिकेटिड आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण पर रोक लगाई गई है। कहा कि सरकार ने इस बारे निर्देश दिए हैं।