किहार (चंबा)। बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करने वाली सरकार के दावे किहार में हवा हो रहे हैं। सरकार ने किहार अस्पताल का दर्जा तो सिविल अस्पताल का कर दिया है, लेकिन लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल रही हैं।
अस्पताल में रात को तो डॉक्टर सेवाएं दे रहा है, जबकि दिन में जुगाड़ के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है। अस्पताल में दिन में ओपीडी 100 से अधिक रहती है। हैरानी की बता है कि अस्पताल में तैनात स्थायी शिक्षक की सेवाएं दिन के बजाय रात को ली जा रही हैं। दिन में प्रतिनियुक्ति के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है। इससे क्षेत्र के लोगों में सरकार के प्रति भारी रोष है। लोगों का आरोप है कि सरकार चिकित्सकों के रिक्त पद तो नहीं भर रही है, दूसरी ओर अस्पताल में तैनात शिक्षक की सेवाएं भी रात को ली जा रही हैं। उन्होंने कहा कि लोग अपनी स्वास्थ्य जांच करवाने के लिए दिन को अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें बेहतर सुविधा नहीं मिल रही है।
सिविल अस्पताल किहार पर क्षेत्र की छह पंचायतों की करीब 15 हजार आबादी निर्भर करती है। यहां चिकित्सकों की तैनाती सरकार नहीं कर पा रही है। - विद्या देवी
वर्तमान में एक ही चिकित्सक तैनात है। वह भी रात के समय नियमित तौर ड्यूटड्दे बजा रहा है। दिन में प्रतिनियुक्ति के सहारे ही व्यवस्था चलाई जा रही है। - गोरखी देवी
सिविल अस्पताल किहार में रोजाना एक सौ से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचते है। नियमित चिकित्सक न होने से मरीजों को बेहतर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। - सुरेश कुमार
सरकार ने भले ही सिविल अस्पताल खोल दिया है, मगर सेवाएं काफी निम्न स्तर की हैं। अस्पताल में चिकित्सक नहीं हैं। ऐसे में काफी परेशानियां पेश आ रही हैं। - ज्ञास देव,
बीएमओ डॉ. सचिन ने बताया कि किहार अस्पताल में चिकित्सक के छह पद रिक्त हैं। अन्य स्टाफ के दस में से 9 पद रिक्त हैं। साथ ही वरिष्ठ फार्मासिस्ट का एक, चतुर्थ श्रेणी कर्मी के आठ पद, बीएमओ कार्यालय में क्लर्कों के चार, सुपरिंटेंडेंट का एक पद रिक्त है। स्थायी चिकित्सक न होने पर दिन के समय डेपुटेशन पर डॉक्टर ड्यूटी दे रहे हैं। नियमित चिकित्सक रात के समय सेवाएं दे रहा है।