चंबा के होली में सेब के पेड़ पर लगा पतझड़ रोग।संवाद
होली (चंबा)। उपमंडल के सेब पकने से पहले ही बगीचों में पतझड़ रोग लग गया है। इस कारण सेब के पौधों से पत्ते टूटकर गिर रहे हैं। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें चिंता सता रही है कि समय रहते इस रोग का निदान नहीं हो पाया तो उनकी साल भर की मेहनत पर पानी फिर जाएगा।
उधर, जिला उद्यान विभाग के अधिकारी ने पतझड़ रोग को अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट करार देकर पेड़ों से गिरने वाले पत्तों को एकत्रित कर गड्ढा कर दबाने या जलाने की सलाह दी है। विभागीय अधिकारी द्वारा 200 लीटर पानी में केपटान 600 ग्राम मिलाकर पेड़ों पर स्प्रे करने की भी सलाह दी है।
होली उपमंडल की पंचायतों में करीब 1500 बागवान सेब की फसल पर ही निर्भर हैं। सेब की उम्दा पैदावार बागवानों के चेहरों पर रौनक ला देती है। कई बार पूरे वर्ष बागवानों को मेहनत के अनुरूप लाभ तक नहीं मिल पाता है। बागवानों में सुरेश कुमार, कमलेश कुमार, विजय कुमार, स्वरूप कुमार, अमित कुमार, हरबंस लाल, मनोज कुमार और रमेश कुमार ने बताया कि सेब के बगीचों में पतझड़ रोग के हमले ने उनकी कमर तोड़ दी है। सेब के पौधों से पत्ते टूटकर गिर रहे हैं। बताया कि जिन पौधों की समय पर कटिंग-प्रूनिंग के साथ स्प्रे की गई है, उनमें और जहां फल नहीं हैं वहां किसी प्रकार का रोग नहीं लगा है। बागवानों ने जिला उद्यान विभाग से इस रोग से सेब के बगीचों को बचाने की गुहार लगाई है।
जिला उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने बताया कि पतझड़ रोग का असर पेड़ पर लगातार दो से तीन वर्षों तक रहता है। बागवान टूटकर गिरने वाले पत्तों को एकत्रित कर गड्ढा खोदकर दबा दें या इन्हें जला दें, जिससे इस बीमारी का पूरी तरह से अंत किया जा सके। बागवान 200 लीटर पानी में 600 ग्राम केपटान मिलाकर सेब बगीचों में स्प्रे कर इस रोग को कम कर सकते हैं।