चंबा। राजकीय महाविद्यालय चंबा में आपदा प्रबंधन को लेकर शैक्षणिक सत्र का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक सत्र का उद्देश्य संस्थानों के उभरते शोधार्थियों के बीच संवाद को सुदृढ़ करना रहा। इस दौरान शोध परियोजना विभाग की सहायक आचार्य डॉ. शालिनी शिखा, डॉ. अवध नारायण चौबे और डॉ. गणेश यादव ने अपना शोध परिणाम और शोध कार्य का व्याख्यान किया। इस दौरान उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कालिंदी कॉलेज के भूगोल विभाग के 28 विद्यार्थियों के दल ने 4 से 12 फरवरी तक शैक्षणिक भ्रमण कर आपदा प्रबंधन पर विस्तृत क्षेत्रीय अध्ययन किया। इस अध्ययन का उद्देश्य क्षेत्र को प्रभावित करने वाली प्राकृतिक आपदाओं की जटिल प्रकृति को समझना तथा स्थानीय समुदायों की संवेदनशीलता एवं लचीलेपन का मूल्यांकन करना था। पर्वतीय भू-आकृति, भूकंप, भूस्खलन, बादल फटना, आकस्मिक बाढ़ और हिमस्खलन जैसी आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील होने के कारण चंबा, आपदा जोखिम अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय प्रयोगशाला के रूप में उभरता है। प्राथमिक आंकड़ों के संकलन के तहत विद्यार्थियों ने गजनुईं, साहो, गलू, बलेरा, कुनम्हा और दुलाप्थर गांवों में घर-घर सर्वेक्षण तथा स्थल निरीक्षण किया। इसके अतिरिक्त, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, दूरस्थ स्थिति और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के लिए प्रसिद्ध भरमौर क्षेत्र में एक विस्तृत केस स्टडी भी संचालित की गई। यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के लिए न केवल व्यावहारिक अनुभव का अवसर सिद्ध हुआ। बल्कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में गहन समझ विकसित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। कार्यक्रम के दौरान डॉ. मनेश वर्मा, प्रोफेसर अविनाश, निशा कुमारी, शिवानी ठाकुर, शिल्पा शर्मा और कॉलेज के विद्यार्थी मौजूद रहे।