भरमौर (चंबा)। भरमौर के चौरासी परिसर में चल रहीं स्थानीय जातरों का शुक्रवार को समापन हुआ। आखिरी जातर मेला महंत प्रेम नारायण गिरी के नाम पर हुआ।
इसमें स्थानीय पुरुषों और महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य किया। मणिमहेश यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को जातर मेलों के दौरान भरमौर की पुरानी संस्कृति से रूबरू होने का मौका मिला। घुरेई नृत्य के बारे में लोगों ने सिर्फ कहानियों और किताबों में पढ़ा होगा, लेकिन जातर के दौरान इसे सामने देखने का मौका मिला। पुरुष सफेद चोला और काला डोरा बांधकर नृत्य करते नजर आए। महिलाएं भी पारंपरिक परिधानों में नृत्य कर रही थीं। हर जातर किसी न किसी देवी-देवता और सिद्ध पुरुष को समर्पित रही। इसलिए हर जातर पर अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा की गई। मंदिर में रात के समय जागरण का आयोजन हुआ। इसमें स्थानीय लोगों ने देवी-देवताओं का गुणगान किया। 16,17 और 18 सितंबर को चौरासी में सांस्कृतिक संध्याएं होंगी। इन जातरों का आयोजन पंचायत अपने स्तर पर करवाती है। इसमें प्रशासन की भागीदारी नहीं रहती।