चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज चंबा में एक चिकित्सक आपातकालीन कक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहा है। उसके साथ एक इंटर्न को मरीजों का इलाज करने के लिए बैठाया जा रहा है।
इसकी वजह से आपातकालीन कक्ष में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। एक एमबीबीएस डॉक्टर आपातकालीन कक्ष में पहुंचने वाली मरीजों की भीड़ को संभाल नहीं पाता। एक मरीज की स्वास्थ्य जांच करने के लिए उसे काफी समय लग जाता है। इतना ही नहीं, मरीजों को बुखार भी स्वयं जांचना पड़ता है। वहां मौजूद डॉक्टर के पास स्वयं मरीज का बुखार जांचने के लिए समय नहीं होता। सबसे ज्यादा परेशान छोटे बच्चों को लाने वाले अभिभावक होते हैं। उनके हाथ में थर्मामीटर और ऑक्सीमीटर थमा दिए जाते हैं। यह भी नहीं पूछा जाता कि उन्हें ये चलाने भी आते हैं या नहीं। इतना ही नहीं, तीमारदारों को यह भी नहीं समझाया जाता कि इन उपकरणों का सही इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है।
स्थानीय लोगों में योगराज, मनीष कुमार, जितेंद्र, पंकज, सुनील कुमार, रवि, प्यार सिंह, नरेंद्र और केवल ने बताया कि छुट्टी वाले दिन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी बंद रहती हैं। ऐसे में मरीज सुबह से लेकर रात तक आपाताकालीन कक्ष में ही अपना इलाज करवाने के लिए निर्भर रहते हैं। आम दिनों में शाम चार बजे के बाद भी ओपीडी का समय खत्म हो जाता है। ऐसे में मरीजों को आपातकालीन कक्ष में जाकर ही अपना ईलाज करवाना पड़ता है, लेकिन वहां एक एमबीबीएस डॉक्टर मरीजों के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए तैनात रहता है। इस वजह से मरीज काफी परेशान हो रहे हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन से मांग की है कि आपातकालीन कक्ष में दो चिकित्सकों की तैनाती की जाए। उधर, चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर बिपन ठाकुर ने बताया कि आपातकालीन कक्ष में दो चिकित्सकों की तैनाती करने को लेकर उचित कदम उठाए जा रहे हैं।