तीसा (चंबा)। किलाड़-बैरागढ़ वाया साच पास मार्ग पर मरथयालू नाला द्वितीय में अचानक हिमखंड गिरने से लोक निर्माण विभाग के आठ मजदूर और मशीनरी दबने से बाल-बाल बच गई। जानकारी के अनुसार विभागीय मजदूर मशीनरी के साथ मरथयालू नाले में सड़क को बहाल करने में जुटे थे। इस दौरान बर्फ हटाते हुए जैसे ही मशीनरी और मजदूर दूसरे छोर पर पहुंचे तो ऊपर से अचानक हिमखंड गिर गया।
इस पर दूसरे दूसरे छोर पर तैनात कर्मचारियों ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। सड़क बहाल करने में जुटे मजदूरों ने चिल्लाने की आवाज सुनते ही बिना वक्त गंवाए वहां से भाग कर अपनी जानें बचाईं। बता दें कि चुराह के बैरागढ़ से रानीकोट तक लोक निर्माण विभाग की मशीनरी के जरिए सात किलोमीटर लंबा मार्ग यातायात के लिए बहाल करवा दिया गया है।
विभाग ने चुराह की तरफ से 12 कर्मचारियों को मार्ग बहाली का जिम्मा सौंपा है। वहीं, किलाड़ से साच पास की ओर 10 अप्रैल से मार्ग बहाली का कार्य आरंभ हुआ है। किलाड़ से मरथयालू नालू तक 19 किलोमीटर सड़क बहाल हो चुकी है। दोनों ओर दो डोजर और एक एलएनटी मशीन समेत 22 कर्मी सड़क बहाल करने में जुटे हैंं। मरथयालू नाले में तीन दिनों की कड़ी मेहनत के बाद पहले से गिरे हिमखंड को हटाया गया था। मगर रविवार को पुन: नाले में 60 मीटर लंबा और 15 मीटर ऊंचे हिमखंड गिरने से अब सड़क को बहाल करने में वक्त लग सकता है।
छह माह के लिए बंद रहता है चंबा-पांगी मार्ग
हर वर्ष सदियों में हिमपात के कारण छह माह के लिए चंबा-पांगी वाया साच-पास मार्ग वाहनों की आवाजाही के लिए बंद हो जाता है। चंबा से वाया साच-पास किलाड़ की करीबन 175 किलोमीटर दूरी है। चुराह की तरफ से बैरागढ़-साचपास-किलाड़ मार्ग पर 60 किलोमीटर तक बर्फ हटाई जाती है। शेष मार्ग पर किलाड़ की ओर से बर्फ हटाई जाती है।
करीब चार सौ किलोमीटर कम हो जाती है दूरी
पांगी घाटी को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाले साच पास के खुलते ही दिनों का सफर घंटों में तय हो पाएगा। वाया साच पास पांगी के किलाड़ से जिला मुख्यालय की दूरी करीब 172 किलोमीटर है, जबकि वाया मनाली यही दूरी करीब 650 किलोमीटर और जम्मू करीब सात सौ किलोमीटर है। मार्ग बहाल होने पर पांगी घाटी के लोगों को वाया साच पास होते हुए जिला मुख्यालय चंबा आसानी से पहुंचने की सुविधा मिलती हैं।
बैरागढ़-साच-पास- किलाड़ मार्ग पर करीबन 16 छोटे-बड़े हिमखंड गिरे हैं। मार्ग पर सबसे बड़ा हिमखंड कालाबन में गिरा है। इसकी ऊंचाई करीब 70 फीट के करीब बताई जा रही है। इसके अलावा सतरूंडी के समीप (कार्थनाला) में 10 हिमखंड गिरे होने की संभावना है। इसकी ऊंचाई करीबन 50 फिट होगी। इसके अलावा साच पास के आस-पास अन्य पांच हिमखंड गिरे होने के क्यास लगाए जा रहे हैं।
नहीं हुआ किसी तरह का नुकसान
मार्ग बहाली में जुटे कर्मचारियों का भी ध्यान रखने के लिए एक बोलेरो वाहन साथ रहता है। इसमें दवाईयां, खाद्य सामग्री और बिस्तर शामिल रहता है, जिससे किसी प्रकार की अप्रिय घटना के समय उन्हें उचित सहूलियत प्रदान करवाई जा सके। लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता मोहिंद्र ठाकुर ने बताया कि मरथयालू नाले में गिरे हिमखंड को हटाकर जैसे ही मशीनी दूसरे छोर पहुंची अचानक ऊपर से हिमखंड आ गया। बहरहाल, किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है।